क्या ‘दीदी’ कायम रखेंगी अपना दबदबा?
सर्वे संकेत दे रहे हैं कि टीएमसी अभी भी बढ़त में है, लेकिन पिछली बार की तुलना में सीटों में गिरावट संभव है। अनुमान के मुताबिक पार्टी को करीब 155 से 170 सीटें मिल सकती हैं, जो बहुमत के आंकड़े से ऊपर तो है, लेकिन 2021 के मुकाबले कम है। वहीं, दूसरी ओर, बीजेपी इस बार मजबूत प्रदर्शन करती दिख रही है। सर्वे के अनुसार पार्टी को 110 से 125 सीटों तक मिल सकती हैं, जिससे मुकाबला काफी कड़ा हो सकता है।
तीसरे मोर्चे की स्थिति कमजोर
लेफ्ट और कांग्रेस का गठबंधन अभी भी मुख्य लड़ाई से बाहर नजर आ रहा है। उनके खाते में केवल 5 से 10 सीटें आने का अनुमान जताया गया है।
ममता बनर्जी की रणनीति
एंटी-इंकंबेंसी को कम करने के लिए ममता बनर्जी ने इस बार कई बड़े फैसले लिए हैं। 75 से अधिक विधायकों के टिकट काटना उनकी आक्रामक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसके साथ ही ‘बंगाल की बेटी’ की छवि को मजबूत कर वे स्थानीय भावनाओं को अपने पक्ष में बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं।
बीजेपी का फोकस ‘परिवर्तन’ पर
बीजेपी इस चुनाव में जनता की नाराजगी को अपने पक्ष में भुनाने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी का पूरा जोर ‘परिवर्तन’ के नारे को जमीन पर उतारने पर है। अगर यह रणनीति सफल रही, तो मुकाबला आखिरी समय तक बेहद रोमांचक हो सकता है।

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