5 सीटें तय करेंगी सियासी दिशा
इस बार चुनाव में पांच ऐसी सीटें हैं, जिन पर पूरे राज्य की नजर टिकी हुई है। इनमें भवानीपुर और नंदीग्राम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। इन सीटों पर बड़े नेताओं के उतरने से मुकाबला बेहद हाई-प्रोफाइल बन गया है। माना जा रहा है कि इन सीटों के नतीजे पूरे राज्य के राजनीतिक समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं।
नंदीग्राम:
नंदीग्राम सीट एक बार फिर सबसे ज्यादा चर्चा में है, जहां भाजपा के शुभेंदु अधिकारी और तृणमूल कांग्रेस के पबित्रा कर के बीच मुकाबला है। 2021 के चुनाव में यहां करीब 1,900 वोटों का बेहद कम अंतर रहा था, जिससे यह सीट आज भी बेहद संवेदनशील मानी जा रही है।
भवानीपुर:
भवानीपुर सीट, जो ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ मानी जाती है, इस बार भी प्रतिष्ठा की सीट बनी हुई है। हालांकि उपचुनाव में उन्होंने 50 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार राजनीतिक परिस्थितियां बदली हुई नजर आ रही हैं और विपक्ष यहां पूरी ताकत लगा रहा है। यहां ममता बनर्जी (टीएमसी) और शुभेंदु अधिकारी (भाजपा) के बिच कड़ा मुकाबला है।
मुर्शिदाबाद:
मुर्शिदाबाद सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय रूप लेता दिख रहा है, जहां तृणमूल कांग्रेस की शाओनी सिंहा रॉय, भाजपा के गौरी शंकर घोष और कांग्रेस के सिद्दीकी अली आमने-सामने हैं। इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 60 प्रतिशत से अधिक मानी जाती है, ऐसे में वोटों का बंटवारा परिणाम को पूरी तरह बदल सकता है।
जादवपुर
जादवपुर सीट पर भी कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। यह सीट लंबे समय तक वाम दलों का गढ़ रही है, लेकिन पिछले चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने यहां जीत दर्ज की थी। इस बार टीएमसी के देबब्रत मजूमदार और सीपीएम के बिकाश रंजन भट्टाचार्य के बीच सीधी टक्कर है।
खड़गपुर सदर
खड़गपुर सदर सीट भी इस चुनाव की अहम सीटों में शामिल है, जहां भाजपा के दिलीप घोष और तृणमूल कांग्रेस के प्रदीप सरकार के बीच मुकाबला है। 2021 के चुनाव में यहां जीत का अंतर महज 4,000 वोटों का रहा था, जिससे यह सीट इस बार भी बेहद करीबी मुकाबले वाली मानी जा रही है।
.png)
0 comments:
Post a Comment