महिलाओं को मिलेगा सुरक्षित सफर
इस योजना के तहत महिला चालक ई-रिक्शा चलाकर स्कूल, कॉलेज, दफ्तर और अन्य स्थानों तक महिलाओं और लड़कियों को सुरक्षित पहुंचाएंगी। इससे खासकर छात्राओं और कामकाजी महिलाओं को बड़ा फायदा मिलेगा, जिन्हें अक्सर सफर के दौरान असुरक्षा का सामना करना पड़ता है।
1000 ई-रिक्शा देने की तैयारी
शुरुआती चरण में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को 1000 ई-रिक्शा उपलब्ध कराने की योजना है। इससे न सिर्फ उनका रोजगार बढ़ेगा, बल्कि वे आत्मनिर्भर भी बनेंगी।
कई जिलों में शुरू हुई पहल
यह योजना फिलहाल अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी, कौशांबी और झांसी में शुरू की जा चुकी है। जल्द ही इसे लखनऊ, प्रयागराज, मिर्जापुर, भदोही, सोनभद्र, देवरिया, लखीमपुर खीरी और सीतापुर में भी लागू किया जाएगा।
महिलाएं बन रही हैं उद्यमी
अब तक इस योजना के तहत 100 से अधिक महिलाओं को ई-रिक्शा देकर उन्हें स्व-रोजगार से जोड़ा गया है। सैकड़ों महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है और बड़ी संख्या में ड्राइविंग लाइसेंस भी जारी किए गए हैं। इससे महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी भी उठा रही हैं।
आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
इस योजना से जुड़ी महिलाओं की औसत सालाना आय तीन लाख रुपये से अधिक पहुंच चुकी है। यह पहल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रही है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। वहीं, महिला चालकों की मौजूदगी से यात्रियों, खासकर महिलाओं और बच्चियों के मन में सुरक्षा का भरोसा बढ़ेगा। इससे बेटियों का स्कूल जाना आसान होगा और कामकाजी महिलाओं का सफर भी पहले से ज्यादा सुरक्षित बनेगा।

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