केरल में किसकी बनेगी सरकार? सर्वे में BJP की क्या है स्थिति

न्यूज डेस्क। केरल में विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक वातावरण गर्म है। राज्य में हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन की परंपरा रही है, लेकिन पिछले एक दशक में यह परंपरा टूटती नजर आई है। 2021 में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की, जिससे मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इतिहास रचा। अब सवाल यह है कि क्या एलडीएफ तीसरी बार सत्ता में बनेगी या यूडीएफ (यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) पुनः सत्ता हासिल कर पाएगा।

वोटिंग रुझान और संभावित परिणाम

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस बार यूडीएफ के लिए बढ़त का मौका है। लंबे समय से सत्ता में रहने वाले एलडीएफ के सामने सत्ता-विरोधी लहर का असर दिख सकता है। 2024 के लोकसभा चुनावों में यूडीएफ ने शानदार प्रदर्शन किया, उसने राज्य की 20 में से 18 सीटों पर जीत हासिल की और वोट शेयर में भी इजाफा किया। इसके अलावा, 2025 के स्थानीय निकाय चुनावों में भी यूडीएफ की मजबूती ने यह धारणा दी कि सत्ता परिवर्तन इस बार संभव हो सकता है।

कांग्रेस और उसकी चुनौती

यूडीएफ का नेतृत्व कांग्रेस के पास है, लेकिन पिछले दशक में कांग्रेस के लिए यह चुनौती रही है कि लोकसभा में जीत के बावजूद राज्य विधानसभा में उसे सफलता नहीं मिलती। हरियाणा और महाराष्ट्र के हाल के उदाहरण बताते हैं कि संसदीय चुनावों की जीत विधानसभा चुनाव में निश्चित सफलता की गारंटी नहीं होती। इसलिए कांग्रेस नेतृत्व को इस बार अपने रणनीति और स्थानीय मुद्दों पर विशेष ध्यान देना होगा।

बीजेपी की बढ़ती चुनौती

बीजेपी, जो पारंपरिक रूप से केरल में तीसरे स्थान पर रही है, ने पिछले दशक में अपने वोट शेयर में लगातार वृद्धि की है। 2024 में त्रिशूर लोकसभा सीट जीतने और तिरुवनंतपुरम में दूसरे स्थान पर रहने से पार्टी की ताकत बढ़ी है। स्थानीय निकाय चुनावों में तिरुवनंतपुरम मेयर पद जीतकर बीजेपी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस बार पार्टी सिर्फ हिंदू मतों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ईसाई और अन्य समुदायों तक भी अपनी पहुंच बनाने का प्रयास कर रही है।

0 comments:

Post a Comment