क्यों घटाया गया ग्रोथ अनुमान?
मूडीज के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, खासकर इस क्षेत्र से। ऐसे में आपूर्ति में बाधा आने पर ईंधन की कीमतें बढ़ना तय है, जिसका सीधा असर परिवहन, उत्पादन और आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
महंगाई बढ़ने का खतरा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि फिलहाल महंगाई नियंत्रण में जरूर है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव इसे फिर से बढ़ा सकता है। अनुमान है कि 2026-27 में औसत महंगाई लगभग दोगुनी होकर 4.8% तक पहुंच सकती है। खासतौर पर खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है, क्योंकि उर्वरकों के लिए भारत काफी हद तक आयात पर निर्भर है।
विकास की रफ्तार पर असर
मूडीज का मानना है कि महंगाई बढ़ने से लोगों की क्रय शक्ति घटेगी, जिससे निजी खपत में कमी आ सकती है। साथ ही औद्योगिक गतिविधियों में सुस्ती और निवेश में गिरावट भी देखने को मिल सकती है। इन सभी कारकों का संयुक्त प्रभाव भारत की कुल आर्थिक वृद्धि पर पड़ेगा।
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