यूपी में प्राइवेट स्कूलों पर सख्ती की तैयारी: अब नहीं चलेगी मनमानी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस और महंगी किताबें थोपने की शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही थीं। अब इस पर लगाम लगाने के लिए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। शैक्षिक सत्र 2026-27 को ध्यान में रखते हुए 15 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

अनधिकृत किताबों पर कड़ा रुख

परिषद ने साफ निर्देश दिए हैं कि स्कूलों में सिर्फ अधिकृत प्रकाशकों की ही किताबें पढ़ाई जाएंगी। कई जगहों पर यह शिकायत मिली थी कि निजी स्कूल जबरन महंगी और अनधिकृत किताबें लागू कर रहे हैं, जिनकी कीमत निर्धारित दरों से कई गुना ज्यादा है। इससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

जिला स्तर पर होगी सख्त निगरानी

सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से स्कूलों का निरीक्षण करें। यदि कहीं नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित प्रबंधक, प्रधानाचार्य या शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, परिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि पाठ्यपुस्तकों का कॉपीराइट उनके पास सुरक्षित है। ऐसे में पायरेसी या नकली किताबों के मामलों में कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

छात्रों को सस्ती किताबें दिलाने की पहल

छात्रों और अभिभावकों को राहत देने के लिए स्कूलों में पुस्तक मेले आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन मेलों के जरिए अधिकृत और गुणवत्तापूर्ण किताबें उचित कीमत पर उपलब्ध कराई जाएंगी। अभिभावकों को भी सलाह दी गई है कि वे केवल वही किताबें खरीदें, जिन पर 7 अंकों का विशेष सीरियल नंबर मौजूद हो। इससे असली और नकली किताबों में फर्क करना आसान होगा।

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