DM की निगरानी में चलेगी पूरी योजना
अब हर जिले में आयुष्मान योजना की समीक्षा जिला स्वास्थ्य समिति के माध्यम से होगी, जिसकी अध्यक्षता DM करेंगे। इस समिति की बैठकों में कई अहम पहलुओं की नियमित जांच की जाएगी। आयुष्मान कार्ड बनने की रफ्तार, अस्पतालों की सूची और उनकी स्थिति, मरीजों को मिल रही इलाज सुविधाएं, लंबित आवेदनों की समीक्षा। इस कदम का मकसद है कि लाभार्थियों को इलाज के दौरान किसी भी तरह की परेशानी न झेलनी पड़े।
अस्पतालों पर बढ़ेगी जवाबदेही
शुरुआती दौर में कई निजी अस्पताल इस योजना से जुड़ने में रुचि नहीं दिखा रहे थे, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। प्रदेश में करोड़ों आयुष्मान कार्ड बनने के बाद अस्पतालों पर योजना से जुड़ने का दबाव बढ़ा है। सरकार अब यह भी सुनिश्चित करेगी कि: कितने अस्पताल योजना से जुड़े हैं, कितने आवेदन लंबित हैं, अस्पतालों में सुविधाएं और डॉक्टर उपलब्ध हैं या नहीं, जहां कमी मिलेगी, वहां तुरंत सुधार के निर्देश दिए जाएंगे।
गड़बड़ियों पर सख्त नजर
हाल के समय में कुछ अस्पतालों में अनियमितताओं के मामले सामने आए थे। इसी को देखते हुए अब जांच और निगरानी को और मजबूत किया गया है। इलाज और क्लेम भुगतान में देरी पर सख्ती होगी, फर्जीवाड़े या लापरवाही करने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई संभव है, मानकों पर खरे न उतरने वाले संस्थानों की समीक्षा की जाएगी, पात्र लोगों तक पहुंच का होगा आकलन। सरकार सिर्फ व्यवस्था सुधार तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि यह भी देखेगी कि योजना का लाभ सही लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं।

0 comments:
Post a Comment