निर्यात में अभूतपूर्व वृद्धि
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में 63 प्रतिशत बढ़कर 38,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। पिछले साल 24,000 करोड़ रुपये के निर्यात के मुकाबले यह 14,802 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी है। यह उन्नति भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं पर विश्व का बढ़ता भरोसा दिखाती है।
इतिहास पर नजर डालें तो:
2014: 1,000 करोड़ रुपये
2021-22: 13,000 करोड़ रुपये
2022-23: 16,000 करोड़ रुपये
2023-24: 21,000 करोड़ रुपये
2024-25: 24,000 करोड़ रुपये
2025-26: 38,000 करोड़ रुपये
अमेरिका और इजरायल भी अब भारत पर निर्भर
अमेरिका को भारत से गोली, एयरो कंपोनेंट्स, हेलीकॉप्टर के ढांचे और बुलेटप्रूफ जैकेट्स निर्यात किए जा रहे हैं। वहीं, मिसाइलों के दिशा-निर्धारण उपकरण भी भारत से ही आते हैं। इजरायल के लिए हर्मेज 900 ड्रोन, एंटी-ड्रोन तकनीक और रॉकेट इंजन भारत से ही उपलब्ध कराए जाते हैं।
ब्रह्मोस, आकाश और अस्त्र: भारत के सितारे
इंडोनेशिया और फिलीपींस ने ब्रह्मोस मिसाइल खरीदी, जबकि वियतनाम, UAE, सऊदी अरब, ब्राजील और अर्जेंटीना भी इसके लिए रुचि दिखा चुके हैं। आर्मेनिया को भारत ने पिनाका रॉकेट निर्यात किया। स्वदेशी एयर-टू-एयर 'अस्त्र' और एंटी-टैंक 'नाग' मिसाइलों के लिए अफ्रीकी और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ बातचीत जारी है।

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