करीब 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे पर वाहनों की अधिकतम गति 120 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है। वर्तमान में जहां कानपुर से लखनऊ पहुंचने में करीब 2 से 2.5 घंटे लग जाते हैं, वहीं इस नए मार्ग के शुरू होने के बाद यह दूरी मात्र 35 से 40 मिनट में तय की जा सकेगी।
3700 करोड़ की लागत
करीब 3700 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेस-वे को अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। इसमें 11 वाहन अंडरपास (VUP), 13 लाइट वाहन अंडरपास (LVUP), 11 पैदल पारपथ, 9.59 किमी लंबा फ्लाईओवर, एक रेलवे ओवरब्रिज और चार बड़े पुल जैसी संरचनाएं शामिल हैं, जिससे यात्रा सुगम और निर्बाध बनी रहे।
सुरक्षा के लिए हाईटेक इंतजाम
यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे एक्सप्रेस-वे पर उन्नत निगरानी प्रणाली स्थापित की गई है। इसमें 63 PTZ कैमरे, 21 इंटरचेंज कैमरे, 16 वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम लगाए गए हैं। इनकी 24×7 निगरानी के लिए दो आधुनिक कंट्रोल रूम भी बनाए गए हैं।
औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
यह एक्सप्रेस-वे केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बनेगा। इसके चालू होने से लॉजिस्टिक्स, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलेगी और आसपास के क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी।
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