विशेषकर जिन कर्मचारियों की वर्तमान बेसिक सैलरी 18,000 रुपए है, उनके लिए यह बदलाव खास महत्व रखता है। 8वें वेतन आयोग के लागू होने पर इनकी ग्रॉस सैलरी 45,000 रुपए से ऊपर पहुंच सकती है। इसमें फिटमेंट, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) शामिल हैं।
फिटमेंट फैक्टर क्या है और क्यों जरूरी है?
फिटमेंट फैक्टर एक गुणांक है, जो पुरानी बेसिक सैलरी को गुणा करके नई बेसिक सैलरी निकालने में काम आता है। जितना अधिक फिटमेंट फैक्टर होगा, सैलरी का बढ़ना उतना अधिक होगा। इसे तय करने में महंगाई, रोजमर्रा खर्च, सरकारी बजट और निजी सेक्टर की सैलरी जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है।
पिछली बार 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, जबकि छठे आयोग में यह 1.92 था। इस बार अनुमानित फैक्टर 1.92 रह सकता है। नई बेसिक सैलरी निकालने का फॉर्मूला है पुरानी बेसिक सैलरी × फिटमेंट फैक्टर = नई बेसिक सैलरी, उदाहरण: 18,000 × 1.92 = 34,560 रुपए, इस तरह बेसिक में 16,560 रुपए का उछाल आएगा।
सैलरी का पूरा ढांचा बदलेगा
8वें वेतन आयोग के लागू होते ही सिर्फ बेसिक सैलरी ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि ग्रॉस सैलरी और भत्तों का पूरा ढांचा बदल जाएगा। बेसिक बढ़ने के साथ स्पेशल रेट अलाउंस (SRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस भी उसी आधार पर बढ़ेंगे। महंगाई भत्ता (DA) भी नई बेसिक पर लागू होगा, जिससे कुल सैलरी और बढ़ जाएगी।
नई ग्रॉस सैलरी कितनी हो सकती है?
नई बेसिक सैलरी: 34,560 रुपए
HRA और TA जोड़कर ग्रॉस सैलरी: 45,000 रुपए से अधिक हो सकता है।

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