TMC आगे, लेकिन मुकाबला टफ
फिलहाल आंकड़े बताते हैं कि TMC अभी भी बढ़त बनाए हुए है। वोट शेयर के स्तर पर पार्टी को करीब 41 से 43 प्रतिशत समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं बीजेपी 34 से 41 प्रतिशत वोट शेयर के साथ तेजी से अंतर कम करती दिख रही है। यह अंतर बताता है कि मुकाबला एकतरफा नहीं, बल्कि बेहद कड़ा होने वाला है।
अनिर्णीत वोटर बन सकते हैं ‘किंगमेकर’
इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात है करीब 13 प्रतिशत मतदाता, जिन्होंने अभी तक अपना रुख साफ नहीं किया है। यही वोटर अंतिम समय में किसी भी पार्टी के पक्ष में माहौल बदल सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही वर्ग चुनाव का रुख तय करेगा।
किन इलाकों में कड़ी टक्कर?
राज्य के कुछ हिस्सों में मुकाबला बेहद रोमांचक होता दिख रहा है। मिदनापुर, उत्तर बंगाल और जंगलमहल जैसे क्षेत्रों में बीजेपी ने मजबूत चुनौती पेश की है। वहीं दक्षिण बंगाल और कोलकाता में ममता बनर्जी की पकड़ अभी भी मजबूत मानी जा रही है।
करीबी मुकाबले वाली सीटें बनेंगी निर्णायक
रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगभग 90 सीटें ऐसी हैं जहां जीत-हार का अंतर बहुत कम रह सकता है। पिछली बार भी कई सीटों पर बेहद कम अंतर से नतीजे तय हुए थे। इस बार भी ये सीटें ही असली ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकती हैं। अगर बीजेपी अपने वोट शेयर में थोड़ा 5 प्रतिशत और इजाफा कर लेती है, तो नतीजे पूरी तरह बदल सकते हैं।
वोट बैंक की राजनीति का असर
राज्य में वोट बैंक का समीकरण भी अहम भूमिका निभा सकता है। मुस्लिम वोटों में संभावित बिखराव AIMIMऔर अन्य उम्मीदवारों की वजह से देखने को मिल सकता है, जो सत्तारूढ़ दल के लिए चुनौती बन सकता है। वहीं एससी वर्ग के मतदाताओं में नाराजगी और युवाओं के बीच बदलता रुझान बीजेपी के लिए अवसर पैदा कर सकता है।
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