मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों से सीधे रिपोर्ट तलब की है और उन्हें निर्देश दिया है कि वे खुद मैदान में उतरकर स्थिति का जायजा लें। अधिकारियों को कहा गया है कि वे किसानों से मिलें, उनकी समस्याएं समझें और वास्तविक नुकसान का आकलन करें। खास बात यह है कि प्रशासन को 24 घंटे के भीतर पीड़ित किसानों तक मुआवजा पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है।
तुरंत सर्वे और राहत पर जोर
सरकार ने राजस्व और कृषि विभाग के साथ-साथ बीमा कंपनियों को भी सक्रिय कर दिया है। सभी संबंधित अधिकारियों को मिलकर फसल नुकसान का संयुक्त सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि नुकसान का सही आंकलन जल्द से जल्द तैयार हो सके और उसी आधार पर राहत राशि जारी की जा सके।
फील्ड में रहने के आदेश
सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे लगातार अपने-अपने क्षेत्रों में मौजूद रहें और प्रभावित इलाकों की निगरानी करें। सिर्फ कागजी कार्रवाई के बजाय जमीन पर जाकर वास्तविक स्थिति को समझने पर जोर दिया गया है। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों को भी निर्देशित किया गया है कि वे फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों से सीधे संपर्क में रहें और हर अपडेट समय पर शासन तक पहुंचाएं।
किसानों से अपील
सरकार ने किसानों से भी सहयोग की अपील की है। उनसे कहा गया है कि वे अपने नुकसान की जानकारी समय पर प्रशासन को दें, जिससे राहत प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।

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