भारत ने किया धमाका: एक्सपोर्ट में दुनिया में पहुंचा नंबर 2!

नई दिल्ली। भारत का मछली पालन सिर्फ लोगों की प्लेट भरने का जरिया नहीं रहा, बल्कि अब यह देश की आर्थिक मजबूती में भी अहम भूमिका निभा रहा है। पिछले दस सालों में सरकार ने इस सेक्टर में 39,272 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसका असर साफ दिख रहा है की आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एक्वाकल्चर प्रोड्यूसर बन चुका है।

मछली उत्पादन में तेज़ी

आंकड़ों की बात करें तो 2019-20 में भारत में मछली का उत्पादन 141.64 लाख टन था, जो 2024-25 तक बढ़कर 197.75 लाख टन तक पहुंच गया है। यह सालाना लगभग 7% की बढ़त दर्शाता है। इस बढ़त का श्रेय भारतीय मछुआरों और किसानों को जाता है, जिन्होंने आधुनिक तकनीक और बेहतर पालन-पोषण विधियों को अपनाया। आज इस सेक्टर से सीधे तौर पर लगभग 3 करोड़ लोग जुड़े हुए हैं।

विदेशी बाजार में बढ़ती मांग

भारतीय समुद्री उत्पादों का निर्यात पिछले 11 वर्षों में दोगुना हो गया है। 2013-14 में 30,213 करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट 2024-25 में बढ़कर 62,408 करोड़ रुपये हो गया। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी झींगा की रही, जिसकी कुल बिक्री 43,334 करोड़ रुपये रही। भारत आज अमेरिका, चीन, जापान और अन्य 130 देशों को 350 से अधिक तरह की मछलियां निर्यात करता है।

सरकार के कदम आसान बनाने के लिए

मछली उद्योग में निर्यात को सरल बनाने के लिए सरकार ने नियमों को डिजिटल कर दिया है। ‘सैनेटरी इम्पोर्ट परमिट’ (SIP) की प्रक्रिया अब सिर्फ 72 घंटे में पूरी हो जाती है, जो पहले 30 दिन में होती थी। इसके अलावा, समुद्री जीवों की सुरक्षा के लिए ‘टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस’ (TED) जैसी तकनीक अपनाई जा रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन सुनिश्चित हो और भारत के निर्यात पर कोई रोक न लगे और इससे सफलता मिल सके।

0 comments:

Post a Comment