रणनीति का केंद्र: मुस्लिम वोट बैंक
कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी को मैदान में उतारकर यह संदेश दिया कि इस बार पार्टी मुकाबले को गंभीरता से ले रही है। पार्टी ने लगभग 70 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने 47 और लेफ्ट-ISF गठबंधन ने 60 मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा। वहीं BJP ने इस बार मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारे।
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर का कहना है कि टिकट वितरण पूरी तरह जनसंख्या और सामाजिक समीकरण के आधार पर किया गया है। उनका मानना है कि बंगाल में मुस्लिम आबादी की संख्या अधिक है, इसलिए उन्हें ज्यादा अवसर मिलना स्वाभाविक है।
मुस्लिम वोट का चुनावी असर
राज्य में मुस्लिम आबादी लगभग 30% है और कई महत्वपूर्ण जिलों में उनका वोट निर्णायक होता है। इसमें मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर, बीरभूम और दक्षिण 24 परगना शामिल हैं। ऐसे में मुस्लिम वोटों का बंटना या किसी दल की तरफ झुकना चुनावी नतीजे बदल सकता है।
मुकाबले की जटिलता
पिछले चुनावों में मुस्लिम मतदाता अधिकतर तृणमूल के पक्ष में रहे। लेकिन इस बार कांग्रेस की नई रणनीति, लेफ्ट-ISF गठबंधन, और AIMIM की एंट्री से वोट बंटने की संभावना बढ़ गई है। AIMIM और AJUP का गठबंधन 182 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है, जिससे मुकाबला और त्रिकोणीय या बहुकोणीय हो सकता है। इनका लाभ बीजेपी को मिल सकता हैं।
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