सुवेंदु अधिकारी की सीधी चुनौती
भवानीपुर में भाजपा ने सुवेंदु अधिकारी को उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा है। खुद केंद्रीय नेतृत्व ने भी इस मुकाबले को खास महत्व दिया है। अमित शाह ने नामांकन के दौरान रोड शो किया, जिससे यह साफ संदेश गया कि भाजपा इस सीट पर कोई भी कमी नहीं छोड़ना चाहती।
सर्वे और ग्राउंड रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ स्थानीय मतदाता, खासकर महिलाएं, बदलाव की मांग कर रही हैं और TMC के खिलाफ भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर अपनी असंतोष जताते दिख रहे हैं। लेकिन कई महिलाएं अभी भी ममता बनर्जी के समर्थन में दिखाई देती हैं।
ममता बनर्जी का अडिग कॉन्फिडेंस
ममता बनर्जी ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने की कोशिशों के बावजूद वह भवानीपुर से ही चुनाव लड़ेंगी और जीतेंगी। उनका कहना है कि भले ही केवल एक मतदाता ही उनका समर्थन करे, वह हार नहीं मानेंगी।
आंकड़ों की गवाही
भवानीपुर की पिछली पॉलिटिकल हिस्ट्री बताते हुए, ममता ने 2021 के उपचुनाव में रिकॉर्ड 58,000 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। हालांकि इस बार भाजपा का दावा है कि हिंदी भाषी और अन्य मतदाता, जो पहले मतदान नहीं करते थे, इस बार उनकी मदद से ममता को हराने का प्रयास करेंगे।
नंदीग्राम बनाम भवानीपुर: प्रतिष्ठा की लड़ाई
यह मुकाबला सिर्फ सीट जीतने का सवाल नहीं, बल्कि व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की लड़ाई भी है। ममता ने 2021 में नंदीग्राम से सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ हार का सामना किया था, लेकिन भवानीपुर से जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक मजबूती साबित की थी। इस बार का मुकाबला इसलिए और भी संवेदनशील माना जा रहा है।
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