प्रधानमंत्री ने सरकारी अधिकारियों को 'कर्मयोगी' कहकर संबोधित किया और कहा कि उनकी भूमिका केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि हर अधिकारी को लगातार सीखते रहना चाहिए ताकि वह बदलते समय के साथ खुद को बेहतर बना सके।
सेवा और संवेदनशीलता पर जोर
पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि सरकारी व्यवस्था का असली उद्देश्य जनता की सेवा करना है। उन्होंने जोर दिया कि शासन को केवल नियमों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसमें करुणा और संवेदनशीलता का समावेश होना जरूरी है। उनके अनुसार, एक सच्चा लोक सेवक वही है जो जनता की जरूरतों को प्राथमिकता दे।
तकनीक और नवाचार पर विशेष फोकस
अपने पत्र में पीएम मोदी ने 21वीं सदी को अवसरों और चुनौतियों का युग बताया। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नवाचार प्रशासन का हिस्सा बन रहे हैं। ऐसे में सरकार की सेवाओं को भी आधुनिक और तकनीक-सक्षम बनाना जरूरी है।
सीखने को बनाया जीवनभर की प्रक्रिया
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सीखना केवल एक चरण नहीं बल्कि जीवनभर चलने वाली प्रक्रिया होनी चाहिए। उन्होंने कर्मचारियों को प्रेरित किया कि वे लगातार खुद को अपडेट रखें और बेहतर प्रदर्शन की दिशा में आगे बढ़ें।
त्योहारों के बीच आया विशेष संदेश
यह पत्र सिविल सेवा दिवस से एक दिन पहले जारी किया गया। पीएम मोदी ने अपने संदेश में देशभर में चल रहे त्योहारों जैसे बैसाखी, बिहू, विशु और अन्य पर्वों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये सभी पर्व नई शुरुआत, आशा और सकारात्मकता का प्रतीक हैं।

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