सरकार ने वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) लागू करने का फैसला लिया है। अब पुष्टाहार का वितरण केवल इसी डिजिटल प्रणाली के माध्यम से मान्य होगा, जिससे गड़बड़ी और फर्जीवाड़े की संभावना कम होगी।
अलग-अलग वर्गों को अलग पोषण
नई व्यवस्था में विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों और महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग रेसिपी तैयार की गई हैं।
6 माह से 1 वर्ष तक के बच्चे: आटा-बेसन का हलवा
1 से 3 वर्ष तक के बच्चे: मीठा हलवा
3 से 6 वर्ष तक के बच्चे: आटा-बेसन बर्फी और दलिया-मूंग-सोया खिचड़ी
गर्भवती और धात्री महिलाएं: बर्फी और पौष्टिक खिचड़ी
इन रेसिपीज में कैलोरी और प्रोटीन के साथ-साथ कई जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भी शामिल किए गए हैं, जिससे संतुलित पोषण सुनिश्चित हो सके।
कुपोषित बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था
सरकार ने अतिकुपोषित बच्चों के लिए भी विशेष आहार की व्यवस्था की है। “बाल संजीवनी” जैसे पोषण कार्यक्रम के तहत उन्हें अतिरिक्त पौष्टिक भोजन दिया जाएगा, जिससे उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो सके। इस योजना के तहत आहार तैयार करने और पहुंचाने की जिम्मेदारी Uttar Pradesh State Rural Livelihood Mission को दी गई है। जहां यह व्यवस्था उपलब्ध नहीं होगी, वहां NAFED के माध्यम से आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
सरकार के द्वारा 301 करोड़ रुपये का फंड मंजूर
इस नई व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए सरकार ने 301.19 करोड़ रुपये का वायबिलिटी गैप फंड (VGF) मंजूर किया है। इसका उद्देश्य उत्पादन इकाइयों को आर्थिक सहयोग देना है, ताकि वे बिना किसी दबाव के गुणवत्तापूर्ण पोषण आहार तैयार कर सकें। यह योजना केवल भोजन वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य कुपोषण को कम करना और बच्चों व महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है।

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