क्या है Jones Act?
1920 में लागू यह कानून अमेरिकी शिपिंग इंडस्ट्री को मजबूत करने के लिए बनाया गया था। इसके तहत देश के भीतर समुद्री परिवहन के लिए अमेरिकी जहाज, अमेरिकी क्रू और अमेरिकी निर्माण की शर्तें जरूरी होती हैं। हालांकि, संकट के समय इस कानून को कई बार महंगा और बाधा पैदा करने वाला भी माना गया है।
क्यों लेना पड़ा ये फैसला?
वैश्विक स्तर पर हालात तेजी से बदल रहे हैं। ईरान से जुड़े तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के कारण तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखी जा रही है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से सप्लाई पर असर पड़ा है। यही रास्ता दुनिया के लगभग 20% तेल के परिवहन के लिए अहम माना जाता है। इन परिस्थितियों में अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में तेज उछाल आया, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ गया।
Jones Act में छूट से क्या बदलेगा?
इस फैसले के तहत अब अगले 60 दिनों तक विदेशी जहाज भी अमेरिका के एक बंदरगाह से दूसरे बंदरगाह तक तेल, गैस, कोयला और अन्य जरूरी सामान ले जा सकेंगे। सामान्य परिस्थितियों में यह काम केवल अमेरिकी जहाजों को ही करने की अनुमति होती है। इससे सप्लाई तेजी से बढ़ेगी, परिवहन लागत कम हो सकती है, बाजार में कीमतों पर दबाव घटेगा
व्हाइट हाउस का क्या कहना है?
व्हाइट हाउस ने इसे एक आपातकालीन कदम बताया है। अधिकारियों के मुताबिक, यह निर्णय बाजार में आई अस्थायी बाधाओं को दूर करने और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।

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