पेंशनर्स की 5 अहम मांगें: 8वें वेतन आयोग से क्यों बढ़ी उम्मीदें?

नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग के गठन की चर्चा शुरू होते ही देशभर के लाखों पेंशनर्स और केंद्रीय कर्मचारियों की उम्मीदें एक बार फिर जाग उठी हैं। हर वेतन आयोग न सिर्फ कर्मचारियों के वेतन ढांचे में बदलाव लाता है, बल्कि पेंशनर्स के जीवन स्तर को भी सीधे प्रभावित करता है। इस बार भी विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने पेंशनर्स के हितों को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण मांगें सामने रखी हैं, जिन पर आयोग के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।

पुरानी पेंशन योजना की बहाली सबसे बड़ी मांग

पेंशनर्स की सबसे प्रमुख मांग पुरानी पेंशन योजना (OPS) को दोबारा लागू करने की है। उनका मानना है कि नई पेंशन प्रणाली (NPS) और एकीकृत पेंशन योजना (UPS) में निश्चित पेंशन की गारंटी नहीं है, जिससे भविष्य की आर्थिक सुरक्षा कमजोर होती है। OPS में रिटायरमेंट के बाद स्थिर आय मिलती थी, जो बुजुर्गों के लिए अधिक सुरक्षित मानी जाती है।

कम्यूटेशन अवधि घटाने की मांग

वर्तमान व्यवस्था में यदि कोई पेंशनर अपनी पेंशन का एक हिस्सा एकमुश्त लेता है, तो उसकी मूल पेंशन बहाल होने में 15 साल का समय लगता है। पेंशनर्स चाहते हैं कि इस अवधि को घटाकर 11 या 12 साल किया जाए, ताकि उन्हें जल्दी पूरी पेंशन का लाभ मिल सके।

हर 5 साल में पेंशन बढ़ोतरी

बढ़ती महंगाई और उम्र के साथ बढ़ते खर्चों को देखते हुए पेंशनर्स ने मांग की है कि उनकी पेंशन में हर पांच साल में कम से कम 5% की वृद्धि सुनिश्चित की जाए। इससे उन्हें आर्थिक रूप से अधिक स्थिरता मिल सकेगी और जीवन स्तर बेहतर बना रहेगा।

फिटमेंट फैक्टर में सुधार

फिटमेंट फैक्टर वह आधार है, जिसके जरिए पेंशन और वेतन को संशोधित किया जाता है। पेंशनर्स की मांग है कि इसे कम से कम 3.0 किया जाए। अगर ऐसा होता है, तो न्यूनतम पेंशन में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है, जिससे लाखों पेंशनर्स को सीधा फायदा होगा।

मेडिकल सुविधाओं में बड़ा सुधार

नॉन-CGHS क्षेत्रों में रहने वाले पेंशनर्स के लिए फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस को ₹1,000 से बढ़ाकर ₹20,000 प्रति माह करने और कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं की मांग रखी गई है। 

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