IRTSA ने उठाए अहम मुद्दे
रेलवे कर्मचारियों के प्रमुख संगठन इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने आयोग को पत्र लिखकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उनका मानना है कि मौजूदा व्यवस्था समय के साथ पुरानी हो चुकी है और इसमें सुधार की जरूरत है।
कर्मचारी वर्गीकरण की मांग
IRTSA ने कहा है कि अभी कर्मचारियों को ग्रुप A, B और C में बांटा गया है, लेकिन बदलती तकनीक और जिम्मेदारियों के कारण यह सिस्टम अब पूरी तरह प्रासंगिक नहीं रहा। संगठन चाहता है कि आयोग इस वर्गीकरण की समीक्षा करे और जरूरत पड़ने पर नया ढांचा तैयार किया जाए, ताकि कर्मचारियों की भूमिका और जिम्मेदारियां बेहतर तरीके से तय हो सकें।
भत्तों को लेकर उठी चिंता
7वें वेतन आयोग में जहां सैकड़ों भत्तों पर चर्चा हुई थी, वहीं इस बार सीमित कैटेगरी का जिक्र होने पर सवाल उठाए गए हैं। IRTSA का मानना है कि हर भत्ता अलग जरूरत और कार्य से जुड़ा होता है, इसलिए इन्हें कम दायरे में रखना कर्मचारियों के हित में नहीं होगा। साथ ही पेंशन और फैमिली पेंशन जैसे मुद्दों को भी स्पष्ट रूप से शामिल करने की मांग की गई है।
करियर ग्रोथ और प्रमोशन पर फोकस
IRTSA ने सुझाव दिया है कि कर्मचारियों के करियर विकास को केवल MACP स्कीम तक सीमित न रखा जाए। इसके बजाय फंक्शनल प्रमोशन को बढ़ावा दिया जाए, जिससे कर्मचारियों को उनके काम और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का मौका मिल सके।
अलग-अलग कर्मचारियों के लिए अलग मंच
संगठन ने यह भी कहा कि रेलवे में अलग-अलग पदों—जैसे इंजीनियरिंग, आईटी और मटेरियल विभाग—की समस्याएं अलग होती हैं। इसलिए आयोग को ऐसा सिस्टम बनाना चाहिए, जहां हर श्रेणी के कर्मचारी अपनी समस्याएं अलग से रख सकें और उन पर विशेष ध्यान दिया जा सके।
कानूनी पहलुओं को भी शामिल करने की मांग
संगठन का कहना है कि कई मामलों में अदालतों के फैसले कर्मचारियों के वेतन और सेवा शर्तों को प्रभावित करते हैं। इसलिए सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और ट्रिब्यूनल के निर्णयों को भी सुझाव प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए।
सुझाव देने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर जोर
IRTSA ने मौजूदा प्रक्रिया में सुधार की मांग करते हुए कहा है कि: सुझाव देने की कैरेक्टर लिमिट बढ़ाई जाए, थीम्स की संख्या बढ़ाई जाए, ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन सुझाव देने की सुविधा भी दी जाए, इससे कर्मचारी और यूनियन अपनी बात विस्तार से रख सकेंगे।
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