क्यों उठ रही है बदलाव की मांग
कर्मचारी संगठनों, खासकर ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस, ने सरकार से मांग की है कि DA की गणना के मौजूदा ढांचे की समीक्षा की जाए। उनका कहना है कि आज के समय में परिवार का खर्च पहले के मुकाबले काफी बढ़ चुका है, लेकिन गणना का आधार अभी भी पुराना ही बना हुआ है।
मौजूदा सिस्टम में क्या दिक्कत है
अभी DA की गणना ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI-IW) के आधार पर की जाती है। यह इंडेक्स महंगाई के अनुसार DA का प्रतिशत तय करता है, जिसे बेसिक सैलरी पर लागू किया जाता है। हालांकि, कर्मचारियों का कहना है कि यह सिस्टम वास्तविक खर्चों जैसे डिजिटल सेवाएं, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा और शहरी जीवन की लागत को पूरी तरह कवर नहीं करता।
कर्मचारियों की अन्य मुख्य मांगें
कर्मचारी संगठनों ने कई बड़े बदलाव सुझाए हैं:
परिवार का आकार बढ़ाने की मांग: मौजूदा फॉर्मूले में 3 सदस्यों का परिवार माना जाता है। इसे बढ़ाकर 5 सदस्य करने की मांग है, ताकि आश्रित माता-पिता जैसे खर्च भी शामिल हो सकें।
आधुनिक खर्चों को शामिल करना: इंटरनेट, मोबाइल, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को अब जरूरी खर्च माना जा रहा है, जिन्हें फॉर्मूले में जगह मिलनी चाहिए।
DA को बेसिक सैलरी में मर्ज करना: कर्मचारियों का तर्क है कि जब DA 50% से ऊपर चला जाए, तो इसे बेसिक में जोड़ देना चाहिए, जिससे भविष्य की गणनाएं भी बेहतर हो सकें।
फिटमेंट फैक्टर और पेंशन सुधार: वेतन वृद्धि को अधिक प्रभावी बनाने के लिए फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने और पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की मांग भी शामिल है।

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