हालांकि आयोग अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स की ओर से लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर ऐसा हो, जो बढ़ती महंगाई के हिसाब से वास्तविक राहत दे सके।
क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?
फिटमेंट फैक्टर वह गुणक होता है, जिससे पुरानी बेसिक सैलरी को नई सैलरी में बदला जाता है। इसी के आधार पर पेंशन और अन्य भत्तों में भी बढ़ोतरी तय होती है। सीधे शब्दों में कहें तो जितना ज्यादा फिटमेंट फैक्टर, उतनी ज्यादा सैलरी और पेंशन।
3.0 फिटमेंट फैक्टर की मांग
फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशन्स ने इस बार फिटमेंट फैक्टर को 3.0 तक ले जाने की मांग रखी है। अगर ऐसा होता है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। हालांकि पहले आई रिपोर्ट्स में इसका अनुमान 1.82 से 2.46 के बीच लगाया गया था, लेकिन मौजूदा मांगों ने इस दायरे को और ऊपर धकेल दिया है।
हाइब्रिड फॉर्मूला: नया गेमचेंजर?
इस बार सबसे दिलचस्प पहलू है “हाइब्रिड फॉर्मूला” का प्रस्ताव। पेंशनर्स संगठनों ने सुझाव दिया है कि फिटमेंट फैक्टर तय करने के लिए तीन अलग-अलग मॉडलों को मिलाया जाए। डॉ. एकरॉयड का फॉर्मूला, 7वें वेतन आयोग का अप्रोच और 5वें वेतन आयोग का कॉन्स्टेंट रिलेटिव इनकम मॉडल। इस संयुक्त मॉडल का मकसद एक ऐसा संतुलित फिटमेंट फैक्टर तैयार करना है, जो मौजूदा आर्थिक हालात और महंगाई दोनों को सही तरीके से दर्शा सके।
बदलती जरूरतों को भी मिले जगह
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि अब सिर्फ खाने-पीने और बेसिक जरूरतों के आधार पर सैलरी तय करना पर्याप्त नहीं है। आज के दौर में इंटरनेट, डिजिटल सेवाएं, हेल्थ इंश्योरेंस और इलाज के बढ़ते खर्च को भी गणना में शामिल किया जाना चाहिए। इसके अलावा परिवार की यूनिट को 3 की जगह 4 सदस्य मानने का सुझाव दिया गया है, ताकि वास्तविक खर्च का सही आकलन हो सके।
अलग-अलग लेवल के लिए अलग फार्मूला?
कुछ सुझावों में यह भी कहा गया है कि कर्मचारियों के अलग-अलग ग्रेड के हिसाब से फिटमेंट फैक्टर अलग हो सकता है। हालांकि पेंशनर्स के मामले में समानता बनाए रखने पर जोर दिया गया है, ताकि किसी तरह का असंतुलन न पैदा हो।
कब आएगी नए वेतन आयोग की फाइनल रिपोर्ट?
फिलहाल 8वां वेतन आयोग डेटा जुटाने और सुझाव लेने की प्रक्रिया में है। उम्मीद जताई जा रही है कि इसकी अंतिम रिपोर्ट 2027 तक सामने आ सकती है और उसी साल इसे लागू भी किया जा सकता है। जानकारों का मानना है कि अगर यूनियनों का दबाव बना रहा, तो फिटमेंट फैक्टर 3.0 या उससे अधिक भी हो सकता है। हालांकि अंतिम फैसला सरकार की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।

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