ओल्ड पेंशन स्कीम vs न्यू पेंशन स्कीम: क्या है बड़ा फर्क? 8वें वेतन आयोग में चर्चा

नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाओं के बीच एक बार फिर पुरानी पेंशन योजना (OPS) और नई पेंशन योजना (NPS) सुर्खियों में हैं। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच यह बहस लगातार जारी है कि आखिर कौन सी योजना ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद है। दोनों ही योजनाओं का उद्देश्य रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सहारा देना है, लेकिन इनके काम करने का तरीका पूरी तरह अलग है। कई कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग कर रहे हैं। 

गारंटी बनाम बाजार आधारित प्रणाली

सबसे बड़ा अंतर पेंशन की गारंटी को लेकर है।

पुरानी पेंशन योजना में रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी को एक तय पेंशन मिलती है, जो आमतौर पर अंतिम वेतन का लगभग 50% होती है। इससे भविष्य की आय को लेकर कोई अनिश्चितता नहीं रहती।

वहीं नई पेंशन योजना पूरी तरह बाजार आधारित है। इसमें मिलने वाली पेंशन इस बात पर निर्भर करती है कि निवेश पर कितना रिटर्न मिला। यानी इसमें निश्चित पेंशन की गारंटी नहीं होती।

योगदान का फर्क

पुरानी पेंशन योजना (OPS) में कर्मचारियों को अपने वेतन से पेंशन के लिए कोई योगदान नहीं देना पड़ता था। पूरा खर्च सरकार उठाती थी।

इसके विपरीत NPS में कर्मचारी को अपनी सैलरी का एक हिस्सा (आमतौर पर 10%) जमा करना होता है, जबकि सरकार भी इसमें योगदान देती है। इस तरह यह एक योगदान आधारित योजना बन जाती है।

महंगाई से जुड़ी राहत

पुरानी पेंशन योजना का एक बड़ा फायदा यह है कि इसमें महंगाई के अनुसार पेंशन बढ़ती रहती है। हर कुछ समय बाद महंगाई राहत (DR) जुड़ने से पेंशनर्स की आय में बढ़ोतरी होती रहती है।

नई पेंशन योजना में ऐसा कोई सीधा प्रावधान नहीं है। पेंशन की वृद्धि बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करती है, न कि महंगाई दर पर।

टैक्स और निकासी नियम

OPS में मिलने वाली पेंशन आमतौर पर पूरी तरह टैक्स-फ्री मानी जाती है, जिससे रिटायरमेंट के बाद आय पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता।

NPS में रिटायरमेंट के समय एक हिस्सा टैक्स-फ्री निकाला जा सकता है, लेकिन शेष राशि को एन्युइटी में निवेश करना होता है, जिससे मिलने वाली पेंशन पर टैक्स लग सकता है।

अन्य सुविधाएं

पुरानी पेंशन योजना के तहत कर्मचारियों को जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) जैसी सुविधाएं भी मिलती थीं, जो अतिरिक्त बचत का विकल्प देती थीं। नई पेंशन योजना में ऐसी सुविधा नहीं होती, क्योंकि यह एक अलग निवेश आधारित ढांचा है।

वर्तमान स्थिति

फिलहाल केंद्र सरकार ने देशभर में पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने का कोई संकेत नहीं दिया है। हालांकि कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर इसे वापस लागू किया है।

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