क्यों पड़ा यह कदम उठाना
हाल के दिनों में खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव, खासकर Strait of Hormuz के आसपास शिपिंग प्रभावित होने से वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ा है। यही मार्ग दुनिया में तेल और गैस सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में भारत जैसे बड़े आयातक देश के सामने गैस संकट की चुनौती खड़ी हो गई।
अमेरिका बना नया सप्लाई पार्टनर
सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए सप्लाई के स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति अपनाई है। इसी के तहत अब भारत ने अमेरिका से भी एलपीजी खरीदना शुरू कर दिया है। जानकारी के अनुसार, करीब 10 लाख टन एलपीजी बड़े गैस कैरियर जहाजों के जरिए मंगाई गई है, जिसमें बड़ा हिस्सा अमेरिका से आया है।
अभी भी खाड़ी देशों पर निर्भरता
हालांकि भारत की गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा अब भी खाड़ी देशों से ही पूरा होता है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए सरकार वैकल्पिक स्रोतों को तेजी से बढ़ा रही है। इससे भविष्य में किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम होगी और सप्लाई अधिक सुरक्षित बनेगी।
अन्य देशों से भी बढ़ रही साझेदारी
भारत केवल अमेरिका तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अन्य देशों के साथ भी गैस आयात को लेकर बातचीत कर रहा है। अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और नॉर्वे जैसे देश भी भारत को एलपीजी सप्लाई करने में रुचि दिखा रहे हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के जरिए भी गैस की खरीद जारी है।
बाजार पर दिख रहा असर
हालांकि सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन कुछ सेक्टर जैसे होटल, रेस्तरां और छोटे उद्योगों को गैस सप्लाई में कमी का असर महसूस हो रहा है। ऐसे में सप्लाई को स्थिर बनाए रखना सरकार के लिए बड़ी प्राथमिकता बन गया है।
भविष्य के लिए मजबूत रणनीति
जानकार मानते हैं कि सप्लाई स्रोतों में विविधता लाने का यह कदम लंबे समय में फायदेमंद साबित होगा। इससे न केवल मौजूदा संकट से राहत मिलेगी, बल्कि भविष्य में किसी भी वैश्विक तनाव के दौरान देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत रहेगी।

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