क्यों लिया गया यह फैसला
प्रदेश में रोजाना बड़ी मात्रा में अंडों की खपत होती है, जिनमें से काफी अंडे दूसरे राज्यों से आते हैं। लंबी दूरी तय कर बाजार तक पहुंचने वाले इन अंडों की ताजगी को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को सुरक्षित और ताजा खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए यह कदम जरूरी माना गया है।
तीन विभाग मिलकर करेंगे निगरानी
इस नियम के पालन के लिए पशुपालन विभाग, खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FSDA) और उद्यान विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये सभी विभाग मिलकर जिला स्तर पर जांच अभियान चलाएंगे। पोल्ट्री फार्म, थोक बाजार और सप्लाई चेन की नियमित जांच होगी ताकि बिना डेट वाले या खराब अंडे बाजार में न बिक सकें।
स्टोरेज नियमों पर भी सख्ती
अंडों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज के नियमों का पालन भी अनिवार्य किया गया है। निर्धारित तापमान पर ही अंडों को सुरक्षित रखा जा सकेगा। नियमों के अनुसार, सामान्य तापमान पर अंडों का उपयोग सीमित समय में करना जरूरी है, जबकि ठंडे तापमान में उनकी अवधि थोड़ी बढ़ जाती है। अब इन मानकों की भी सख्ती से जांच की जाएगी।
उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा फायदा
इस नई व्यवस्था से आम लोगों को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वे आसानी से यह जान सकेंगे कि अंडा कितना ताजा है और कब तक उपयोग योग्य है। इससे खराब या बासी अंडे खरीदने का खतरा कम होगा और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी घटेंगे।
जागरूकता अभियान भी चलेगा
सरकार केवल नियम लागू करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को इसके प्रति जागरूक भी किया जाएगा। एक्सपायरी डेट की अहमियत समझाने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे, ताकि उपभोक्ता खुद भी सतर्क रहें।
स्थानीय उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
प्रदेश में अंडों की मांग उत्पादन से काफी ज्यादा है। इसे देखते हुए सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी पोल्ट्री यूनिट्स और बैकयार्ड फार्मिंग को बढ़ावा दे रही है। इससे स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ेगा और दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम होगी।

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