हाल ही में संसद की रक्षा संबंधी समिति ने भारत को 6वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने की सलाह दी है। इस समिति की अध्यक्षता राधा मोहन सिंह कर रहे हैं। यह सिफारिश भारत को भविष्य के युद्धों के लिए तैयार करने की दिशा में एक बड़ा संकेत मानी जा रही है।
क्या होगा 6th जनरेशन फाइटर जेट?
6वीं पीढ़ी का फाइटर जेट सिर्फ एक विमान नहीं, बल्कि एक “फ्लाइंग कमांड सेंटर” होगा। इसमें दुश्मन के रडार से पूरी तरह बचने की क्षमता होगी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए खुद निर्णय लेने की ताकत, ड्रोन के झुंड को कंट्रोल करने की क्षमता, लेजर हथियारों और एडवांस सेंसर से लैस सिस्टम। यह तकनीक युद्ध के पूरे खेल को बदल सकती है।
समिति की बड़ी सिफारिशें
संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कई अहम सुझाव दिए हैं।
भारत को तुरंत 6G फाइटर जेट प्रोग्राम पर काम शुरू करना चाहिए
पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह की युद्ध क्षमता को साथ लेकर चलना होगा
वायुसेना की भूमिका अब अंतरिक्ष के नजदीकी क्षेत्र (Near-Space) तक बढ़ानी होगी
यह साफ संकेत है कि आने वाला समय “हाइब्रिड वॉरफेयर” का होगा।
5th Gen से 6th Gen की चुनौती
भारत पहले से ही AMCA जैसे 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। लेकिन 6th जनरेशन तक पहुंचना आसान नहीं है। इसके लिए जरूरत होगी एडवांस इंजन (Adaptive Cycle Engine), क्वांटम सेंसर, हाई-लेवल एआई और डेटा प्रोसेसिंग सिस्टम, संभव है कि भारत को इस दिशा में फ्रांस या अमेरिका जैसे देशों के साथ सहयोग करना पड़े।
चीन से मुकाबले की तैयारी
चीन पहले ही 6वीं पीढ़ी की तकनीक और स्पेस वॉरफेयर पर भारी निवेश कर रहा है। ऐसे में भारत के लिए यह कदम केवल तकनीकी उन्नति नहीं, बल्कि रणनीतिक जरूरत भी बन गया है।
भारत की ताकत क्या है?
भारत की आईटी और सॉफ्टवेयर क्षमता 6th जनरेशन फाइटर जेट के विकास में बड़ा रोल निभा सकती है। क्योंकि यह जेट एक “उड़ता हुआ सुपरकंप्यूटर” होगा, जिसमें डेटा और नेटवर्किंग सबसे अहम होंगे।

0 comments:
Post a Comment