बिहार में इन शिक्षकों को बड़ा झटका, वेतनमान का दावा खारिज

पटना। राज्य के प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत बीएड योग्यताधारी शिक्षकों को बड़ा झटका लगा है। शिक्षा विभाग ने उनके उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने नियुक्ति तिथि से प्रशिक्षित वेतनमान देने की मांग की थी। यह फैसला पटना हाई कोर्ट के निर्देश पर हुई सुनवाई के बाद लिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

बीएड डिग्री रखने वाले शिक्षकों का तर्क था कि उन्हें नियुक्ति के समय से ही प्रशिक्षित शिक्षक का वेतनमान मिलना चाहिए। लेकिन विभाग ने अपने विस्तृत आदेश में इस मांग को नियमों के खिलाफ बताते हुए अस्वीकार कर दिया। शिक्षा विभाग का कहना है कि यह दावा न केवल आधारहीन है, बल्कि वर्तमान नियमावली से मेल भी नहीं खाता।

इन नियमों का हवाला

विभाग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि NCTE की अधिसूचना के अनुसार कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने वाले बीएड शिक्षकों के लिए 6 महीने का ‘ब्रिज कोर्स’ अनिवार्य है। यह भी साफ किया गया कि बीएड डिग्री को सीधे तौर पर डीएलएड या अन्य प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षण के बराबर नहीं माना जा सकता। इसलिए जब तक शिक्षक यह ब्रिज कोर्स पूरा नहीं करते, तब तक उन्हें प्रशिक्षित वेतनमान का अधिकार नहीं बनता।

पुराने केस का तर्क नहीं चला

शिक्षकों ने अपने पक्ष में एक पुराने केस (एलपीए 1699/2013) का हवाला दिया था। लेकिन विभाग ने जांच में पाया कि वह मामला अलग परिस्थितियों से जुड़ा था, जहां 1999 से 2005 के बीच नियुक्त शिक्षकों को विभागीय देरी के कारण प्रशिक्षण नहीं मिल पाया था। वर्तमान मामले में ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया, क्योंकि ये शिक्षक 2007 से 2017 के बीच अलग नियमों के तहत नियुक्त हुए थे।

सिर्फ बीएड डिग्री से नहीं मिलेगा लाभ

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल बीएड डिग्री के आधार पर प्राथमिक स्तर के लिए पूर्ण रूप से प्रशिक्षित शिक्षक नहीं माना जा सकता। ब्रिज कोर्स पूरा किए बिना वेतनमान में वृद्धि या एरियर का दावा मान्य नहीं होगा।

विभाग के इस फैसले का हजारों शिक्षकों पर असर

इस फैसले का असर राज्य के हजारों शिक्षकों पर पड़ेगा, जो लंबे समय से वेतन वृद्धि और एरियर की उम्मीद में कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। विभाग ने आदेश को सार्वजनिक कर संबंधित जिलों को भी निर्देशित किया है।

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