नया टैक्स सिस्टम होगा ज्यादा आसान
सरकार का उद्देश्य टैक्स नियमों को जटिलता से निकालकर आसान बनाना है। इसी के तहत अब कई पुराने टर्म और प्रक्रियाओं को बदला जा रहा है, ताकि आम लोगों के लिए टैक्स भरना और समझना दोनों सरल हो सके।
‘एसेसमेंट ईयर’ की जगह ‘टैक्स ईयर’
अब तक टैक्स भरते समय “Assessment Year” और “Financial Year” जैसे शब्दों से लोग अक्सर भ्रमित हो जाते थे। नए नियम के तहत “Assessment Year” की जगह “Tax Year” शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और समझने योग्य बनेगी।
ITR फाइलिंग की तारीख में बदलाव
आईटीआर फाइलिंग की समयसीमा में भी बदलाव किया गया है। अब तक ज्यादातर टैक्सपेयर्स को 31 जुलाई तक रिटर्न भरना होता था, लेकिन नए नियम के तहत ITR-3 और ITR-4 (नॉन-ऑडिट) फाइल करने वालों को 31 अगस्त तक का समय मिलेगा। यानी करीब एक महीने की अतिरिक्त राहत। हालांकि ITR-1 और ITR-2 भरने वालों के लिए डेडलाइन में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
रिवाइज्ड रिटर्न के नियम हुए सख्त
रिवाइज्ड रिटर्न को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है। अगर कोई करदाता अपनी गलती सुधारना चाहता है, तो उसे तय समय सीमा के भीतर ही ऐसा करना होगा। 31 दिसंबर के बाद रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने पर अतिरिक्त चार्ज देना पड़ सकता है, जबकि अंतिम तारीख 31 मार्च तय की गई है। इसका सीधा मतलब है कि अब लापरवाही महंगी पड़ सकती है।
गोल्ड निवेश पर भी टैक्स लागू
सोने में निवेश करने वालों के लिए भी नियम बदले हैं। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में पहले कुछ स्थितियों में टैक्स छूट मिलती थी, लेकिन अब अगर इसे सेकेंडरी मार्केट से खरीदा जाता है, तो उस पर कैपिटल गेन टैक्स देना होगा। इससे गोल्ड निवेशकों की रणनीति में बदलाव आ सकता है।
शेयर बाजार निवेशकों पर भी असर
नए नियमों का असर शेयर बाजार से जुड़े निवेशकों पर भी साफ दिखाई देगा। फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है, यानी ढाई गुना तक बढ़ोतरी। वहीं ऑप्शन प्रीमियम पर यह टैक्स 0.10% से बढ़कर 0.15% हो गया है। इससे एक्टिव ट्रेडर्स की लागत बढ़ेगी और मुनाफे पर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, शेयर बायबैक से होने वाली कमाई को भी अब टैक्स के दायरे में लाया गया है। पहले निवेशकों को इस पर टैक्स नहीं देना पड़ता था, लेकिन अब यह मुनाफा कैपिटल गेन के रूप में टैक्सेबल होगा। उदाहरण के तौर पर अगर किसी निवेशक को बायबैक से 1 लाख रुपये का फायदा होता है, तो उसे अपने टैक्स स्लैब के अनुसार 5% से 30% तक टैक्स देना पड़ सकता है।

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