इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या इन देशों की कुछ नीतियां अमेरिकी उद्योग और व्यापार के लिए नुकसानदेह साबित हो रही हैं। यदि जांच में ऐसा पाया जाता है कि किसी देश की नीति अमेरिकी कंपनियों के साथ अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा कर रही है, तो अमेरिका उस देश के उत्पादों पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगा सकता है या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध भी लगा सकता है।
जांच की प्रक्रिया
इस जांच की जिम्मेदारी अमेरिका की व्यापार नीति से जुड़ी सरकारी संस्था को दी गई है। जांच की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। सबसे पहले औपचारिक रूप से जांच शुरू की जाती है। इसके बाद संबंधित देशों की सरकारों से बातचीत की जाती है और उद्योग जगत तथा आम लोगों से भी राय मांगी जाती है। अप्रैल के मध्य तक लोगों से सुझाव मांगे जाएंगे और इसके बाद सार्वजनिक सुनवाई होने की संभावना है। आम तौर पर ऐसी जांच पूरी होने में लगभग एक वर्ष का समय लग सकता है।
ये देश जांच में शामिल
इस नई जांच में कुल 16 अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और मेक्सिको जैसे बड़े व्यापारिक साझेदार देश शामिल हैं। इसके अलावा यूरोप का साझा संगठन, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, ताइवान और कंबोडिया भी जांच के दायरे में हैं। अमेरिका इन देशों की औद्योगिक नीतियों, सरकारी सहायता, मुद्रा नीति, श्रम नियमों और पर्यावरण से जुड़े नियमों की जांच करेगा।
जांच शुरू करने की वजह
इस जांच के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण हाल ही में अमेरिका की सर्वोच्च अदालत का एक फैसला भी माना जा रहा है। अदालत ने पहले लागू किए गए एक बड़े आयात शुल्क कार्यक्रम के कुछ हिस्सों को रद्द कर दिया था। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने वैकल्पिक कानूनी रास्तों की तलाश शुरू की और उसी के तहत अब यह नई जांच शुरू की गई है।
उल्लंघन मिलने पर क्या होगा
यदि जांच में यह पाया जाता है कि किसी देश की नीतियां अमेरिकी व्यापार के लिए नुकसानदेह हैं, तो अमेरिका उस देश के उत्पादों पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगा सकता है। इसके अलावा व्यापारिक रियायतें समाप्त करने या नए समझौते के लिए दबाव बनाने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। हालांकि कई बार ऐसे मामलों में देशों के बीच बातचीत के जरिए समाधान भी निकाल लिया जाता है।
भारत के लिए क्यों अहम है मामला
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध काफी बड़े हैं। इसलिए अगर इस जांच में भारत की किसी नीति पर सवाल उठते हैं तो इसका असर भारतीय निर्यात पर पड़ सकता है। हालांकि आम तौर पर ऐसे मामलों में दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए रास्ता निकाल लिया जाता है। इसलिए आने वाले महीनों में भारत और अमेरिका के बीच होने वाली व्यापारिक चर्चाओं पर भी सबकी नजर बनी रहेगी।

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