पहले 5 साल में, अब हर साल देना होगा ब्यौरा
अब तक सरकारी कर्मचारियों को अपनी संपत्ति की घोषणा हर पांच साल में करनी पड़ती थी, लेकिन नए नियम लागू होने के बाद यह प्रक्रिया वार्षिक कर दी गई है। यानी अब हर कर्मचारी को साल में एक बार अपनी संपत्ति का पूरा विवरण विभाग को देना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि इससे सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और आर्थिक गतिविधियों पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी।
निवेश की जानकारी देना भी होगा जरूरी
नए नियमों के तहत अगर कोई सरकारी कर्मचारी अपने छह महीने के मूल वेतन से अधिक राशि शेयर, म्यूचुअल फंड, डिबेंचर, बॉन्ड या अन्य वित्तीय साधनों में निवेश करता है, तो उसे इसकी जानकारी भी अपने विभाग को देनी होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कर्मचारियों की आय और निवेश का स्रोत स्पष्ट रहे।
जानकारी नहीं देने पर हो सकती है कार्रवाई
सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि कोई कर्मचारी अपनी संपत्ति का विवरण समय पर नहीं देता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इतना ही नहीं, ऐसे मामलों में कर्मचारी की पदोन्नति भी रोकी जा सकती है।
भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की कोशिश
सरकार के अनुसार इस फैसले का मुख्य उद्देश्य सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार और अघोषित आय पर रोक लगाना है। नई व्यवस्था के तहत डिजिटल रिकॉर्ड और सूचना प्रणाली के माध्यम से कर्मचारियों की आर्थिक गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। इससे बेनामी संपत्ति या संदिग्ध निवेश को छिपाना आसान नहीं होगा। इस कदम से सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और जवाबदेही मजबूत होगी। वहीं कर्मचारियों को भी अब अपनी वित्तीय गतिविधियों को लेकर अधिक सतर्क रहना पड़ेगा।
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