संभावना जताई जा रही है कि नया वेतन ढांचा 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो कर्मचारियों और पेंशनर्स को उस तारीख से लागू होने तक का एरियर भी मिल सकता है।
भारत में वेतन आयोग क्यों बनाया जाता है?
भारत में सरकारी कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और भत्तों की समीक्षा करने के लिए समय-समय पर वेतन आयोग गठित किया जाता है। पहला वेतन आयोग 1946 में बनाया गया था। इसके बाद अब तक सात वेतन आयोग लागू किए जा चुके हैं।
हर वेतन आयोग देश की आर्थिक स्थिति, महंगाई दर और कर्मचारियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वेतन ढांचे में बदलाव की सिफारिश करता है। इसी वजह से पिछले कई दशकों में सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में लगातार बढ़ोतरी हुई है।
1st से 7th वेतन आयोग तक सैलरी का सफर
पहला वेतन आयोग (1946)
आजादी से पहले बने इस आयोग के दौरान न्यूनतम बेसिक सैलरी लगभग 55 रुपये थी, जबकि अधिकतम वेतन करीब 2,000 रुपये तक तय किया गया था।
दूसरा वेतन आयोग (1957)
दूसरे आयोग में कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी बढ़ाकर करीब 80 रुपये कर दी गई, जबकि अधिकतम वेतन लगभग 3,000 रुपये तक पहुंच गया।
तीसरा वेतन आयोग (1973)
तीसरे वेतन आयोग में कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा बदलाव किया गया। अधिकतम वेतन लगभग 3,500 रुपये तय किया गया।
चौथा वेतन आयोग (1986)
इस आयोग के बाद सरकारी कर्मचारियों के वेतन में बड़ा उछाल आया। न्यूनतम वेतन 750 रुपये और अधिकतम वेतन करीब 8,000 रुपये तक हो गया।
पांचवां वेतन आयोग (1996)
पांचवें वेतन आयोग के बाद न्यूनतम बेसिक सैलरी 2,550 रुपये कर दी गई, जबकि अधिकतम वेतन 26,000 रुपये तक पहुंच गया।
छठा वेतन आयोग (2006)
छठे वेतन आयोग ने वेतन ढांचे में कई बड़े बदलाव किए। इसके बाद न्यूनतम सैलरी लगभग 7,000 रुपये और अधिकतम वेतन करीब 80,000 रुपये तक पहुंच गया।
सातवां वेतन आयोग (2016)
वर्तमान में लागू सातवें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये तय की गई है, जबकि अधिकतम सैलरी 2.5 लाख रुपये तक जाती है।
8वें वेतन आयोग से कर्मचारियों को क्या उम्मीद?
अब सभी की नजर 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर है। माना जा रहा है कि इस आयोग में कर्मचारियों के वेतन ढांचे की फिर से समीक्षा की जाएगी और महंगाई को देखते हुए सैलरी में बढ़ोतरी की जा सकती है।
सैलरी में कितना बढ़ सकता है इजाफा?
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यदि नए वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.0 या उससे अधिक तय किया जाता है, तो शुरुआती स्तर के कर्मचारियों की सैलरी में अच्छी वृद्धि हो सकती है। अनुमान यह भी लगाया जा रहा है कि अगर फिटमेंट फैक्टर करीब 2.57 रखा गया, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़कर लगभग 46,000 रुपये तक पहुंच सकती है। इससे कर्मचारियों की कुल सैलरी में लगभग 30 से 34 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव मानी जा रही है।
8वें वेतन आयोग की तैयारी के तहत सरकार ने कर्मचारियों, पेंशनर्स और कर्मचारी संगठनों से सुझाव भी मांगे हैं। इसमें सैलरी, पेंशन, भत्तों और सेवा से जुड़े अन्य मुद्दों पर राय दी जा सकती है। सरकार ने सुझाव देने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की है और इसकी अंतिम तारीख 30 अप्रैल 2026 तय की गई है।

0 comments:
Post a Comment