ईरान युद्ध से बढ़ी दुनिया की टेंशन, रूस को बड़ा मौका, पुतिन क्यों खुश?

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक राजनीति को नई दिशा दे दी है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर लगातार हमलों के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक दिलचस्प कूटनीतिक हलचल भी देखने को मिल रही है।

अमेरिका के  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन से फोन पर बातचीत की है। खास बात यह है कि एक सप्ताह के भीतर दोनों नेताओं के बीच दो बार बातचीत हुई, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि वैश्विक तनाव के बीच अमेरिका भी स्थिति को लेकर गंभीर चर्चा कर रहा है।

रूस के लिए बन गया नया मौका

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान पर अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने रूस के लिए नया अवसर पैदा कर दिया है। रूस इस स्थिति का उपयोग खाड़ी क्षेत्र में अपनी भूमिका मजबूत करने के लिए कर सकता है। कुछ समय पहले तक ट्रंप खुद को कई अंतरराष्ट्रीय विवादों में मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहे थे। लेकिन अब परिस्थितियां बदलती दिख रही हैं और मॉस्को ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम कराने की पहल की पेशकश की है।

खुद को शांति का दूत दिखाने की कोशिश

रूस के राष्ट्रपति पुतिन अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को शांति स्थापित करने वाले नेता के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार हालिया बातचीत में पुतिन ने ईरान संकट का कूटनीतिक समाधान निकालने के कई सुझाव भी सामने रखे हैं। बताया जा रहा है कि इन सुझावों में खाड़ी देशों के नेताओं, ईरानी नेतृत्व और अन्य देशों के साथ संपर्क कर तनाव कम करने की रणनीति शामिल है। हालांकि दूसरी ओर रूस ने यूक्रेन के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखी हुई है।

ट्रंप से रिश्ते मजबूत रखने की रणनीति

विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन की सक्रियता के पीछे एक रणनीतिक कारण यह भी है कि वे ट्रंप के साथ कामकाजी संबंध बेहतर बनाए रखना चाहते हैं। रूस को उम्मीद है कि अमेरिका के साथ संवाद बनाए रखने से उसे यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर कुछ राहत मिल सकती है। इसी वजह से रूस ने ईरान के समर्थन की बात तो की है, लेकिन अमेरिकी नेतृत्व की सीधी आलोचना करने से भी बचता रहा है।

तेल की बढ़ती कीमतों से भी रूस को फायदा

ईरान संकट का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। इससे रूस को आर्थिक रूप से फायदा हो सकता है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा ऊर्जा निर्यात पर निर्भर करता है।

रिपोर्टों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतें अचानक बढ़कर लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गईं, जिससे वैश्विक बाजार में हलचल मच गई। तेल की कीमतें बढ़ने से रूस के सरकारी राजस्व में भी बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है।

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