भारत-रूस की दोस्ती फिर चर्चा में, तेल-गैस डील से दुनिया हैरान

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में हालात बिगड़ने के बाद ऊर्जा आपूर्ति को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ी है। ऐसे समय में भारत और रूस के बीच बढ़ता ऊर्जा सहयोग एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में दोनों देशों के शीर्ष स्तर पर बातचीत में क्षेत्रीय हालात, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक बाजार पर पड़ रहे प्रभावों पर विस्तार से विचार किया गया।

ऊर्जा सुरक्षा पर भारत की बढ़ी चिंता

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का भारत पर सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा होता है। खाड़ी देशों से भारत को बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस मिलती है। इसके अलावा वहां लाखों भारतीय काम भी करते हैं, जिनकी आय का भी भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ता है। इसी वजह से भारत इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और संभावित संकट से निपटने के लिए रणनीति तैयार कर रहा है।

रूस से कच्चे तेल की खरीद में तेजी

ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत ने हाल के महीनों में रूस से कच्चे तेल के आयात में बड़ी वृद्धि की है। पहले जहां रूस से तेल की खरीद अपेक्षाकृत कम थी, वहीं अब इसमें करीब 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। बताया जा रहा है कि फरवरी महीने में भारत रूस से लगभग 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात कर रहा था, जो मार्च में बढ़कर करीब 15 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया। भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में पारंपरिक आपूर्ति मार्ग प्रभावित होने पर रूस से बढ़ती खरीद ने भारत को राहत देने का काम किया है।

रूस बन सकता है बड़ा विकल्प

ऊर्जा संकट के इस दौर में रूस भारत के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर रहा है। दोनों देशों के बीच पहले से ही मजबूत ऊर्जा सहयोग मौजूद है और जरूरत पड़ने पर रूस से अतिरिक्त तेल आपूर्ति मिलने की संभावना भी जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया से आपूर्ति प्रभावित होती है तो रूस से बढ़ता सहयोग भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बना सकता है।

बहुआयामी रणनीति पर काम

मौजूदा हालात को देखते हुए भारत कई स्तरों पर रणनीति तैयार कर रहा है। एक ओर कूटनीतिक बातचीत के जरिए क्षेत्रीय हालात पर नजर रखी जा रही है, वहीं दूसरी ओर ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि रूस समेत अन्य देशों के साथ सहयोग बढ़ाकर ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखा जाए और किसी भी संभावित संकट का असर देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर कम से कम पड़े।

आगे की स्थिति पर नजर

पश्चिम एशिया की स्थिति फिलहाल अनिश्चित बनी हुई है। ऐसे में भारत अपनी कूटनीतिक और ऊर्जा रणनीति को लगातार मजबूत कर रहा है। आने वाले समय में भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग और भी गहरा हो सकता है, जो वैश्विक ऊर्जा संतुलन में अहम भूमिका निभा सकता है।

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