राज्य सरकार का मानना है कि इस बदलाव से जमीन की खरीद-फरोख्त में होने वाली धोखाधड़ी और एक ही जमीन की कई बार रजिस्ट्री जैसे मामलों पर रोक लगाई जा सकेगी। इस संबंध में फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में लिया गया।
रजिस्ट्री से पहले होगी खतौनी की जांच
नई व्यवस्था के अनुसार अब किसी भी जमीन या संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले खतौनी और मालिकाना अधिकार की जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही रजिस्ट्री के लिए समय निर्धारित किया जाएगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिस जमीन को बेचा या खरीदा जा रहा है, उस पर किसी प्रकार का विवाद या धोखाधड़ी न हो।
एक घंटे के भीतर करानी होगी रजिस्ट्री
नई प्रणाली के तहत संपत्ति की जांच के बाद रजिस्ट्री के लिए एक निश्चित समय का स्लॉट दिया जाएगा। यह स्लॉट केवल एक घंटे के लिए मान्य होगा। खरीदने और बेचने वाले दोनों पक्षों को इसी एक घंटे के भीतर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। यदि तय समय के भीतर रजिस्ट्री नहीं हो पाती है तो वह स्लॉट स्वतः निरस्त हो जाएगा।
स्लॉट रद्द होने पर फिर करनी होगी पूरी प्रक्रिया
यदि किसी कारण से तय समय में रजिस्ट्री नहीं हो पाती और स्लॉट रद्द हो जाता है, तो फिर से नया समय लेने के लिए पूरी प्रक्रिया दोबारा करनी पड़ेगी। इसके लिए संपत्ति बेचने और खरीदने वाले दोनों पक्षों को फिर से पंजीकरण कार्यालय में उपस्थित होना होगा। इसके बाद संपत्ति से जुड़ी जांच और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही नया स्लॉट दिया जाएगा।
सरकार के नई व्यवस्था से धोखाधड़ी पर लगेगी रोक
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन की रजिस्ट्री में धोखाधड़ी की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी। पिछले कुछ समय में ऐसे कई मामले सामने आए थे, जिनमें एक ही जमीन की कई बार रजिस्ट्री कर दी गई थी। नई प्रणाली से ऐसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा और जमीन के असली मालिक की पहचान सुनिश्चित होगी।
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