बताया जा रहा है कि वर्ष 2026 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन भारत में अगस्त या सितंबर के आसपास किया जाएगा। इसके बाद 2027 में इस सम्मेलन की मेजबानी चीन करेगा। ऐसे में चीन की ओर से भारत के साथ समन्वय बढ़ाने का संदेश अहम माना जा रहा है।
प्रतिस्पर्धा नहीं, साझेदारी पर जोर
बीजिंग में आयोजित एक वार्षिक प्रेस वार्ता के दौरान वांग यी ने कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के रूप में नहीं बल्कि साझेदार के रूप में देखना चाहिए। उनके मुताबिक दोनों देशों को एक-दूसरे को खतरे के बजाय अवसर के रूप में समझने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के लिए दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व द्वारा तय दिशा का पालन किया जाना चाहिए।
नेताओं की मुलाकातों से बढ़ी बातचीत
चीन के विदेश मंत्री ने बताया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हाल के वर्षों में हुई बैठकों ने दोनों देशों के संबंधों में नई शुरुआत का रास्ता खोला है। उनके अनुसार पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच विभिन्न स्तरों पर बातचीत फिर से सक्रिय हुई है। व्यापार में भी नया रिकॉर्ड देखने को मिला है और लोगों के बीच संपर्क बढ़ा है, जिससे दोनों देशों को व्यावहारिक लाभ हुआ है।
एशिया के विकास के लिए सहयोग जरूरी
वांग यी ने कहा कि भारत और चीन एशिया के दो बड़े देश हैं और दोनों के बीच सहयोग क्षेत्रीय और वैश्विक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि आपसी विश्वास और सहयोग से दोनों देशों को लाभ होगा, जबकि टकराव एशिया की प्रगति के लिए नुकसानदेह हो सकता है। ऐसे में इस साल भारत में होने वाला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन दोनों देशों के लिए कूटनीतिक सहयोग और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने का एक अहम अवसर माना जा रहा है।

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