सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रसोई गैस, ऊर्जा और अन्य जरूरी सेवाओं की आपूर्ति किसी भी स्थिति में बाधित न हो। इसी के तहत तेल शोधन संयंत्रों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्रमुख हाइड्रोकार्बन स्रोतों से मिलने वाली गैस को भी एलपीजी आपूर्ति व्यवस्था में शामिल करने के लिए कहा गया है।
क्या है आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून
आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून वर्ष 1968 में संसद द्वारा पारित किया गया था। इसका उद्देश्य ऐसी सेवाओं की निरंतर आपूर्ति बनाए रखना है, जिन पर आम लोगों का दैनिक जीवन निर्भर करता है। इस कानून के लागू होने के बाद आवश्यक सेवाओं में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए हड़ताल करना प्रतिबंधित हो जाता है।
इस कानून के तहत कर्मचारी बंद या अन्य परिस्थितियों का हवाला देकर काम से इनकार नहीं कर सकते। यदि कोई व्यक्ति या संगठन इसके बावजूद हड़ताल करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह कानून अधिकतम छह महीने तक लागू किया जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय हालात के बीच लिया गया फैसला
सरकार ने यह कदम अचानक नहीं उठाया है। हाल के दिनों में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष और पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण ऊर्जा बाजार में चिंता का माहौल बना हुआ है। इससे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है। इन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार पहले ही रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग अवधि 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर चुकी है। इसका उद्देश्य जमाखोरी को रोकना और गैस की उपलब्धता को संतुलित बनाए रखना है।
एलपीजी आपूर्ति पर सरकार की नजर
सरकारी अधिकारियों के अनुसार देश में फिलहाल एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए मांग में अचानक बढ़ोतरी देखी गई है। आशंका के कारण लोगों ने पहले से ज्यादा सिलेंडर बुक कराना शुरू कर दिया था, जिससे मांग लगभग 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गई।
औसतन एक परिवार साल भर में 14.2 किलोग्राम के सात से आठ गैस सिलेंडर का उपयोग करता है। सामान्य परिस्थितियों में एक सिलेंडर छह सप्ताह तक चल जाता है, इसलिए सरकार ने बुकिंग की अवधि बढ़ाकर संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर असर नहीं
अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने के बावजूद फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है। Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum जैसी तेल विपणन कंपनियां फिलहाल लागत का दबाव स्वयं वहन कर रही हैं।

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