सरकार ने इन सुझावों को भेजने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 तय की है। अलग-अलग कर्मचारी संगठनों और यूनियनों ने वेतन, पेंशन और पदोन्नति से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव आयोग के सामने रखे हैं। माना जा रहा है कि यदि इनमें से कुछ प्रमुख मांगों को स्वीकार किया जाता है, तो कर्मचारियों की आय और सुविधाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
1. न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़ाने की मांग
कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम मूल वेतन में बड़ी बढ़ोतरी की मांग की है। फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम बेसिक वेतन करीब 18,000 रुपये है। प्रस्ताव दिया गया है कि इसे बढ़ाकर लगभग 51,000 से 57,000 रुपये के बीच किया जाए, ताकि बढ़ती महंगाई के अनुसार वेतन संरचना बेहतर हो सके।
2. फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने का प्रस्ताव
वेतन निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले फिटमेंट फैक्टर को भी बढ़ाने की मांग की गई है। मौजूदा समय में यह 2.57 है, लेकिन कर्मचारी संगठनों का सुझाव है कि इसे 2.86 से 3.00 के बीच किया जाए। अगर ऐसा होता है तो कर्मचारियों के कुल वेतन में लगभग 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव मानी जा रही है।
3. मल्टी-लेवल फिटमेंट फैक्टर
कुछ संगठनों ने अलग-अलग स्तर के कर्मचारियों के लिए अलग फिटमेंट फैक्टर लागू करने का सुझाव दिया है। इसके तहत निचले स्तर के कर्मचारियों के लिए अधिक और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए थोड़ा अलग अनुपात तय करने की बात कही गई है, ताकि वेतन संरचना अधिक संतुलित बन सके।
4. सालाना वेतन वृद्धि में बदलाव
कर्मचारी संगठनों ने वार्षिक वेतन वृद्धि यानी Annual Increment की दर बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा है। वर्तमान में कर्मचारियों को हर साल करीब 3 प्रतिशत की वृद्धि मिलती है। सुझाव दिया गया है कि इसे बढ़ाकर 5 से 7 प्रतिशत तक किया जाए।
5. पुरानी पेंशन योजना की बहाली
कई कर्मचारी संगठन लंबे समय से पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की मांग करते रहे हैं। उनका कहना है कि इससे कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और पेंशन की निश्चितता बनी रहेगी।
6. न्यूनतम पेंशन में सुधार
पेंशनभोगियों के लिए भी बेहतर व्यवस्था की मांग की गई है। प्रस्ताव है कि मौजूदा न्यूनतम पेंशन 9,000 रुपये से बढ़ाकर लगभग 20,000 से 25,000 रुपये के बीच की जाए, ताकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बेहतर आर्थिक सहारा मिल सके।
7. MACP योजना में बदलाव
कर्मचारियों की पदोन्नति और वित्तीय उन्नयन से जुड़ी MACP (Modified Assured Career Progression) योजना में भी बदलाव का सुझाव दिया गया है। प्रस्ताव है कि लाभ मिलने का अंतराल कम किया जाए, जिससे कर्मचारियों को करियर में आगे बढ़ने के ज्यादा अवसर मिल सकें।
8. फैमिली यूनिट फॉर्मूले में बदलाव
वेतन निर्धारण में इस्तेमाल होने वाले फैमिली यूनिट फॉर्मूले को भी बदलने का सुझाव दिया गया है। इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या बढ़ाकर वेतन तय करने की बात कही गई है, ताकि बढ़ती महंगाई और पारिवारिक जरूरतों को ध्यान में रखा जा सके।
कब तक लागू हो सकती हैं सिफारिशें
आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए लगभग 18 महीने का समय दिया गया है। हालांकि वेतन संशोधन को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जा सकता है, लेकिन वास्तविक भुगतान और एरियर का वितरण संभवतः 2027 या 2028 के दौरान शुरू हो सकता है।

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