दरअसल, भारत के लिए आयात होने वाले तेल का बड़ा हिस्सा होर्मुज की खाड़ी के रास्ते आता है। अनुमान के अनुसार भारत के कुल आयातित तेल का लगभग 55 प्रतिशत इसी मार्ग से आता था। लेकिन क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण यहां से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो गई है, जिससे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई।
रूस से बढ़ी तेल खरीद
इस बीच अमेरिका ने 6 मार्च को भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की विशेष छूट दी। इस अवसर का लाभ उठाते हुए भारतीय कंपनियों ने रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद लिया। रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि के दौरान भारत ने लगभग 3 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदा है, जिससे देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली।
रूस बना भारत का प्रमुख आपूर्तिकर्ता
यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस भारत के लिए कच्चे तेल का बड़ा स्रोत बन गया था। पिछले वर्ष के मध्य में भारत रोजाना 20 लाख बैरल से अधिक तेल रूस से मंगा रहा था। हालांकि बाद में अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण भारत ने रूस से खरीद थोड़ी कम कर दी और सऊदी अरब तथा इराक से ज्यादा तेल खरीदना शुरू कर दिया। लेकिन पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट के कारण अब फिर से रूस की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
किन कंपनियों ने खरीदा सबसे ज्यादा तेल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत की दो बड़ी कंपनियों ने रूसी कच्चे तेल की बड़ी खरीदारी की है। इंडियन ऑयल ने लगभग 1 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदा। रिलायंस उद्योग समूह ने भी करीब 1 करोड़ बैरल तेल खरीदा। बताया जा रहा है कि इन कंपनियों ने बाजार में उपलब्ध रूसी तेल के सभी कार्गो खरीद लिए।
रूस ने कर दी है तेल की कीमत में बदलाव
जानकारी के अनुसार भारत ने रूस से जो तेल खरीदा है उसमें यूराल, ईएसपीओ और वरांडेय श्रेणी का कच्चा तेल शामिल है। दिलचस्प बात यह है कि पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने से पहले यही रूसी तेल अंतरराष्ट्रीय कीमत से कम दाम पर मिल रहा था। लेकिन अब बाजार की स्थिति बदल गई है और यह तेल अंतरराष्ट्रीय मानक तेल से 2 से 8 डॉलर प्रति बैरल तक महंगा मिल रहा है।

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