इस अभियान के तहत शिक्षकों को अपने क्षेत्र में घर-घर जाकर सर्वे करने की जिम्मेदारी दी गई है। वे ऐसे बच्चों की पहचान करेंगे जो किसी कारणवश स्कूल नहीं जा रहे हैं या पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं। इन बच्चों को फिर से स्कूल में दाखिला दिलाकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।
अभियान को दो चरणों में संचालित किया जाएगा। पहला चरण 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण 1 जुलाई से 15 जुलाई तक आयोजित किया जाएगा। जिलाधिकारियों को इस अभियान की निगरानी और सफल संचालन के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने छोटे बच्चों की शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया है। तीन वर्ष की आयु पूरी कर चुके बच्चों का नामांकन आंगनबाड़ी या बालवाटिका में कराया जाएगा। वहीं, छह वर्ष की आयु वाले बच्चों को कक्षा एक में प्रवेश दिलाया जाएगा। इसके साथ ही कक्षा पाँच से छह, कक्षा आठ से नौ और कक्षा दस से ग्यारह में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस अभियान में आशा वर्कर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और ईसीसीई शिक्षकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। वे तीन से पांच वर्ष के बच्चों की सूची तैयार करेंगे और उनके नामांकन की प्रक्रिया में सहयोग करेंगे। साथ ही उच्च कक्षाओं में जाने वाले छात्रों की जानकारी भी संबंधित विद्यालयों को उपलब्ध कराई जाएगी।
अभियान के दौरान बालिकाओं की शिक्षा को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। यदि किसी बालिका को पढ़ाई में कठिनाई हो रही है, तो उसे कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को भी शिक्षा से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी बच्चे को जन्म प्रमाणपत्र या आधार कार्ड न होने के कारण प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा। प्रत्येक विद्यालय को इस अभियान के संचालन के लिए 2500 रुपये की सहायता राशि भी प्रदान की जाएगी।

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