रूस से कच्चे तेल की खरीद में तेज बढ़ोतरी
ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत ने रूस से कच्चे तेल के आयात में बड़ी वृद्धि की है। पहले जहां रूस से तेल की खरीद अपेक्षाकृत कम थी, वहीं अब इसमें करीब 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। बताया जा रहा है कि फरवरी महीने में भारत रूस से लगभग 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात कर रहा था, जो मार्च में बढ़कर करीब 15 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता बनी चिंता
भारत के तेल आयात का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया के देशों से आता है, जो मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत तक पहुंचता है। लेकिन युद्ध और सुरक्षा कारणों से इस समुद्री मार्ग पर गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। इसी वजह से भारत ने तेजी से अपने आयात के स्रोतों में बदलाव किया और रूस से तेल खरीद बढ़ाकर ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने की कोशिश की।
रसोई गैस की आपूर्ति बनी बड़ी चुनौती
कच्चे तेल की आपूर्ति को तो वैकल्पिक स्रोतों के जरिए काफी हद तक संभाल लिया गया है, लेकिन रसोई गैस की स्थिति अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। भारत अपनी कुल जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयातित गैस से पूरा करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, देश में उपयोग होने वाली रसोई गैस का एक बड़ा भाग विदेशों से आता है और उसका अधिकांश हिस्सा उसी समुद्री मार्ग से गुजरता है जो फिलहाल प्रभावित है।
सरकार ने उठाए जरूरी कदम
स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं और उत्पादन बढ़ाने के लिए रिफाइनरियों को भी कहा गया है। इसके अलावा आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और नए स्रोतों से आयात बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि, मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए आने वाले कुछ सप्ताह भारत के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

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