भारत बनेगा ड्रोन हब, अब आसमान से दुश्मनों पर बरसेगी आग

नई दिल्ली। भारत का रक्षा क्षेत्र तेजी से आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ रहा है। इसी कड़ी में देश के बढ़ते ड्रोन उद्योग को जल्द ही बड़ा प्रोत्साहन मिलने वाला है। रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनी Solar Defence ने नागपुर स्थित MIHAN Special Economic Zone में नया ड्रोन निर्माण केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है।

इस संयंत्र में हर साल लगभग 50 मध्यम ऊंचाई और लंबी अवधि तक उड़ान भरने वाले ड्रोन तैयार किए जा सकेंगे। यह कदम भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

स्वदेशी ड्रोन कार्यक्रम से जुड़ा प्रोजेक्ट

यह परियोजना भारत के स्वदेशी ड्रोन कार्यक्रम Archer‑NG से जुड़ी हुई है। इस ड्रोन को मुख्य रूप से भारतीय सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का नेतृत्व Aeronautical Development Establishment कर रहा है, जो Defence Research and Development Organisation के अधीन कार्य करता है। इस साझेदारी के जरिए ड्रोन के बड़े पैमाने पर उत्पादन की योजना बनाई जा रही है।

क्या है आर्चर-एनजी ड्रोन

आर्चर-एनजी एक ऐसा ड्रोन है जो मध्यम ऊंचाई पर लंबे समय तक उड़ान भर सकता है। इस श्रेणी के ड्रोन का इस्तेमाल मुख्य रूप से निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और टोही मिशनों के लिए किया जाता है। भविष्य में इन ड्रोन का उपयोग जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई और लक्ष्य पर हमला करने जैसे मिशनों में भी किया जा सकता है।

उन्नत तकनीक से लैस होगा ड्रोन

यह ड्रोन कई आधुनिक उपकरणों से लैस होगा। इसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, रडार और संचार प्रणाली जैसे उपकरण लगाए जाएंगे। इनकी मदद से यह लंबे समय तक हवा में रहकर दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रख सकेगा। आर्चर-एनजी को भारत के पुराने Rustom UAV Programme का उन्नत रूप माना जा रहा है, जिसे और आधुनिक तकनीक के साथ तैयार किया जा रहा है।

आधुनिक युद्ध में ड्रोन की बढ़ती भूमिका

आज के समय में ड्रोन युद्ध की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। इनका उपयोग सीमा पर निगरानी, समुद्री गश्त और युद्ध के दौरान तुरंत जानकारी हासिल करने के लिए किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना ने भी अपनी ड्रोन क्षमता को तेजी से बढ़ाया है, ताकि आधुनिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

ड्रोन निर्माण का बड़ा केंद्र बन सकता है नागपुर

नागपुर का एमआईएचएएन विशेष आर्थिक क्षेत्र तेजी से विमानन और रक्षा निर्माण का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। यहां पहले से कई विमानन और रक्षा क्षेत्र की कंपनियां काम कर रही हैं। यदि यह नया उत्पादन केंद्र शुरू होता है तो इससे भारत की स्वदेशी ड्रोन निर्माण क्षमता मजबूत होगी। साथ ही सेना को बड़ी संख्या में घरेलू स्तर पर विकसित ड्रोन उपलब्ध कराना भी आसान हो जाएगा।

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