अमेरिका की ओर से किए गए इन हमलों में उन ठिकानों को निशाना बनाया गया जो जमीन के काफी अंदर बनाए गए थे और जहां मिसाइलों का भंडारण तथा उत्पादन किया जाता था।
भूमिगत ठिकानों पर गिराए गए भारी बम
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने बताया कि अमेरिकी बी-2 बॉम्बर विमानों ने ईरान के गहराई में बने मिसाइल केंद्रों और हथियार भंडारण स्थलों पर करीब 2000 पाउंड वजनी बंकर-भेदी बम गिराए। ये बम खास तौर पर मजबूत कंक्रीट और जमीन के नीचे बने सैन्य ढांचों को नष्ट करने के लिए तैयार किए जाते हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस हमले से ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान हुआ है।
72 घंटे में 200 ठिकानों पर हमला
अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार पिछले 72 घंटों में ईरान के करीब 200 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इनमें मिसाइल भंडारण केंद्र, उत्पादन इकाइयां और भूमिगत सुरंगों से जुड़े ठिकाने शामिल बताए जा रहे हैं। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का मकसद ईरान की मिसाइल क्षमता को कमजोर करना और उसके सैन्य नेटवर्क को बड़ा झटका देना है।
तेहरान में जोरदार धमाके
हमलों के बाद तेहरान और उसके आसपास के इलाकों में कई जोरदार धमाकों की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि मेहराबाद हवाई अड्डा के आसपास भी विस्फोट की आवाजें सुनी गईं। इस बीच इजरायल की सेना ने दावा किया है कि उसने तेहरान के आसमान में अपनी हवाई बढ़त स्थापित कर ली है।
संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता
बढ़ते तनाव को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ईरान से खाड़ी देशों पर हमले तुरंत रोकने की अपील की है। परिषद का कहना है कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। जानकारों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबे समय तक चलता है तो इसका असर पूरी दुनिया की राजनीति और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है।
.png)
0 comments:
Post a Comment