रक्षा वैज्ञानिक ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं, जिससे मौजूदा रॉकेट और पोर्टेबल वायु रक्षा प्रणाली को हवा से हवा में मार करने वाले हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।
छोटे रॉकेट से गिराए जाएंगे ड्रोन
इस योजना में 70 मिमी और 80 मिमी रॉकेट को नए रूप में विकसित करने पर काम चल रहा है। वर्तमान में इन रॉकेटों का इस्तेमाल हेलीकॉप्टर से जमीन पर हमले के लिए किया जाता है। अब वैज्ञानिक इन रॉकेटों में नई मार्गदर्शन तकनीक जोड़कर उन्हें हवा में उड़ रहे ड्रोन को गिराने के लिए सक्षम बनाना चाहते हैं।
रॉकेट में लगाए जाएंगे आधुनिक सेंसर
इन रॉकेटों को अधिक सटीक बनाने के लिए उनमें लेजर या इंफ्रारेड मार्गदर्शन प्रणाली और प्रॉक्सिमिटी फ्यूज लगाए जा सकते हैं। इसका मतलब यह होगा कि रॉकेट लक्ष्य के पास पहुंचते ही फट जाएगा और छोटे व तेज ड्रोन को भी आसानी से नष्ट कर सकेगा। इस तकनीक की मदद से एक हेलीकॉप्टर या लड़ाकू विमान एक साथ कई ड्रोन को निशाना बना सकेगा। इससे महंगी मिसाइलों के उपयोग की आवश्यकता भी कम हो जाएगी।
80 मिमी रॉकेट परियोजना पर भी काम
नए 80 मिमी रॉकेट सिस्टम के विकास में IIT Madras और Bharat Electronics Limited भी शामिल हैं। यह रॉकेट मौजूदा प्रणाली की तुलना में अधिक दूरी तक मार करने, ज्यादा भार ले जाने और बेहतर सटीकता प्रदान करने में सक्षम हो सकता है। हालांकि शुरुआत में इसे जमीन पर हमले के लिए बनाया गया था, लेकिन अब इसे ड्रोन विरोधी हथियार के रूप में भी विकसित करने की योजना है।
VSHORAD प्रणाली भी बनेगी ज्यादा ताकतवर
रक्षा वैज्ञानिक स्वदेशी VSHORADS प्रणाली को भी और उन्नत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। यह मूल रूप से सैनिकों द्वारा कंधे से दागा जाने वाला पोर्टेबल वायु रक्षा हथियार है, जो करीब 6 किलोमीटर की दूरी तक कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लक्ष्य को मार सकता है। इसमें इमेजिंग इंफ्रारेड सीकर लगा होता है, जो लक्ष्य को पहचानकर सटीक हमला करता है।
हवा से छोड़ी जाने वाली मिसाइल में बदलेगा सिस्टम
यदि इस प्रणाली को हेलीकॉप्टर या लड़ाकू विमान से छोड़े जाने योग्य बनाया जाता है, तो यह कम लागत वाला लेकिन प्रभावी हवा से हवा में मार करने वाला हथियार बन सकता है। इसका फायदा यह होगा कि छोटे ड्रोन या बड़ी संख्या में आने वाले ड्रोन हमलों को रोकने के लिए महंगी मिसाइलों का इस्तेमाल कम करना पड़ेगा।

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