माना जा रहा है कि आयोग की सिफारिशों का असर देश के लाखों परिवारों पर पड़ेगा। अनुमान के अनुसार करीब 48 लाख केंद्रीय कर्मचारी और लगभग 67 लाख पेंशनर्स इस प्रक्रिया से प्रभावित होंगे।
सुझाव देने के लिए पोर्टल किया गया शुरू
आयोग ने सुझाव लेने के लिए डिजिटल व्यवस्था बनाई है। इसके तहत कर्मचारी और पेंशनर्स निर्धारित समय के भीतर ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपनी राय दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए आधिकारिक वेबसाइट 8cpc.gov.in और innovateindia.mygov.in का उपयोग किया जा सकता है। यह पोर्टल 5 मार्च 2026 से सक्रिय है और 30 अप्रैल 2026 तक खुला रहेगा। इस अवधि के दौरान इच्छुक लोग अपने सुझाव सीधे आयोग तक पहुंचा सकते हैं।
कई वर्गों को दिया गया सुझाव देने का मौका
आयोग ने सुझाव देने के लिए विभिन्न वर्गों को शामिल किया है। इसमें केंद्र सरकार के अलग-अलग विभागों में काम करने वाले कर्मचारी, पेंशनर्स और उनके संगठन शामिल हैं। इसके अलावा ऑल इंडिया सर्विस के अधिकारी, रक्षा बलों से जुड़े कर्मचारी, केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारी और कई अन्य सरकारी संस्थानों के कर्मचारी भी अपनी राय दे सकते हैं। आयोग का मानना है कि अलग-अलग क्षेत्रों से मिलने वाले सुझावों से कर्मचारियों की वास्तविक जरूरतों को समझने में मदद मिलेगी।
केवल ऑनलाइन तरीके से ही भेजे जा सकेंगे सुझाव
आयोग ने साफ किया है कि सुझाव देने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। इसके लिए आवेदकों को MyGov अकाउंट के माध्यम से लॉगइन करना होगा। लॉगइन के बाद वे अपने विचार या मांगें पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं। साथ ही आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ईमेल, कागजी आवेदन या किसी अन्य माध्यम से भेजे गए सुझावों पर विचार नहीं किया जाएगा। केवल पोर्टल पर जमा किए गए सुझाव ही मान्य होंगे।
सुझावों के लिए बनाई गई अलग-अलग श्रेणियां
आयोग ने सुझावों को व्यवस्थित तरीके से प्राप्त करने के लिए चार श्रेणियां तय की हैं।
पहली श्रेणी में व्यक्तिगत कर्मचारी या पेंशनर अपनी राय दे सकते हैं।
दूसरी श्रेणी कर्मचारी यूनियन और पेंशनर संगठनों के लिए है।
तीसरी श्रेणी में मंत्रालय, विभाग और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन शामिल हैं।
चौथी श्रेणी न्यायिक संस्थानों और अदालतों से जुड़े कर्मचारियों के लिए बनाई गई है।
जरूरत पड़ने पर आयोग इन सुझावों को संबंधित मंत्रालयों और विभागों के साथ साझा भी कर सकता है।

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