दरअसल, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा इंटर और मैट्रिक की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्य चल रहा है। इसी के तहत गोराडीह प्रखंड के 45 शिक्षकों की ड्यूटी सीएमएस स्कूल स्थित मूल्यांकन केंद्र पर लगाई गई थी। इस संबंध में विभाग की ओर से पहले ही ड्यूटी चार्ट जारी कर दिया गया था, लेकिन निर्धारित तिथि पर ये शिक्षक मूल्यांकन केंद्र पर उपस्थित नहीं हुए।
मामला तब सामने आया जब मूल्यांकन केंद्र के केंद्राधीक्षक ने अनुपस्थित शिक्षकों की सूची जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा) के कार्यालय को भेजी। इसके बाद शिक्षा विभाग ने सभी शिक्षकों से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा।
शिक्षकों ने अपने जवाब में बताया कि उन्हें मूल्यांकन ड्यूटी से संबंधित कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ था, इसलिए वे निर्धारित समय पर केंद्र पर नहीं पहुंच सके। हालांकि विभागीय समीक्षा में पाया गया कि अधिकांश शिक्षकों के स्पष्टीकरण लगभग एक जैसे हैं। कई शिक्षकों ने यह भी कहा कि उन्हें स्पष्टीकरण से संबंधित पत्र रात करीब 11:24 बजे मिला, जिसके बाद उन्होंने अपना जवाब भेजा।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि मूल्यांकन कार्य से जुड़ी जानकारी बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के पोर्टल पर भी उपलब्ध रहती है। इसके अलावा जिला स्तर से यह सूचना संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के माध्यम से शिक्षकों तक पहुंचाई जाती है। आमतौर पर यह प्रक्रिया मूल्यांकन शुरू होने से करीब एक सप्ताह पहले पूरी कर ली जाती है।
ऐसे में विभाग को यह आश्चर्यजनक लगा कि शिक्षकों को ड्यूटी से संबंधित पत्र नहीं मिला, लेकिन स्पष्टीकरण मांगने वाला पत्र उन्हें तुरंत प्राप्त हो गया। इसी कारण विभाग ने शिक्षकों के जवाब को असंतोषजनक माना। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा) ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि एक ही प्रखंड के इतने अधिक शिक्षकों का मूल्यांकन केंद्र पर अनुपस्थित रहना चिंताजनक है।
इससे मूल्यांकन कार्य भी प्रभावित हुआ है। इसी आधार पर संबंधित शिक्षकों के वेतन में कटौती की अनुशंसा की गई है और इसके लिए डीपीओ स्थापना को पत्र भेजा जा रहा है। साथ ही विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि इस मामले में किस स्तर पर चूक हुई, इसकी जांच की जाए। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
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