शिक्षकों के लिए नया प्रशिक्षण प्रोग्राम
शिक्षा विभाग ने यह निर्णय लिया है कि जिन स्कूलों का प्रदर्शन लर्निंग आउटकम में कमजोर रहेगा, वहां के शिक्षकों को फिर से प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) के माध्यम से होगा, जिन्हें सरकार अब 'वाइब्रेंट एक्सीलेंस संस्थान' के रूप में तैयार करने का प्लान कर रही है।
अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर ने सभी 38 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में बुनियादी संरचना को सशक्त बनाने के निर्देश दिए हैं। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह कदम शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने के साथ ही छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने में सहायक होगा।
नए मानकों से होगा प्रदर्शन का आकलन
एनईपी 2020 के तहत छात्रों और शिक्षकों के प्रदर्शन को आंकने के लिए नए मानक तय किए जा रहे हैं। इन मानकों के आधार पर शिक्षकों को प्रशिक्षण और सुधारात्मक दिशा में मार्गदर्शन मिलेगा। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण में अब एनईपी के तहत अपनाए जाने वाले सभी नवाचारों और शिक्षण मानकों पर जोर दिया जाएगा।
जिला स्तर पर निगरानी होगी सशक्त
सरकार ने निर्णय लिया है कि प्रत्येक जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में ‘विद्या समीक्षा केंद्र’ स्थापित किया जाएगा। इन केंद्रों के जरिए स्कूलों की निगरानी जिला स्तर से की जाएगी। इस पहल से शिक्षा विभाग को यह पता लगेगा कि कौन-से शिक्षक और स्कूल बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं और कहाँ सुधार की जरूरत है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी बड़ा निवेश
शिक्षा बजट में इस वर्ष डायट को वाइब्रेंट एक्सीलेंस संस्थान बनाने के लिए वित्तीय प्रावधान किया गया है। यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में स्थायी सुधार लाने और शिक्षकों की क्षमता को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस पहल से बिहार के शिक्षक न केवल अपनी योग्यता बढ़ा पाएंगे, बल्कि छात्रों के लिए बेहतर सीखने का वातावरण भी सुनिश्चित होगा।

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