आयोग को मिला नया दफ्तर
हाल ही में आयोग को जनपथ स्थित चंद्रलोक बिल्डिंग में कार्यालय आवंटित किया गया है। इसकी अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट की जज, न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। इसे आयोग के ऑपरेशनल फेज में प्रवेश का संकेत माना जा रहा है। इसी बीच एनसी-जेसीएम (स्टाफ साइड) की ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक 25 फरवरी से शुरू हुई। इसमें लगभग 1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की मांगों को एक संयुक्त चार्टर के रूप में अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस पर जोर
कर्मचारी संगठनों ने सबसे ज्यादा जोर फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) को बढ़ाने पर दिया है। मांग की गई है कि गैर-CGHS क्षेत्रों में रहने वाले कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए FMA को मौजूदा 1,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रतिमाह किया जाए। उनका तर्क है कि बढ़ती मेडिकल महंगाई और ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित सुविधा को देखते हुए यह राशि बुनियादी स्वास्थ्य जरूरतें पूरी करने के लिए अपर्याप्त है।
फिटमेंट फैक्टर और सालाना बढ़ोतरी
3.25 के फिटमेंट फैक्टर की मांग दोहराई गई है। साथ ही कर्मचारियों ने सालाना इंक्रीमेंट को मौजूदा 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है, जबकि कुछ संगठनों ने 5 प्रतिशत वृद्धि का सुझाव दिया। उनका तर्क है कि लंबे समय तक 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी से वास्तविक आय में खास फर्क नहीं पड़ता। परिवार इकाई की संख्या को 3 से बढ़ाकर 5 करने की मांग भी उठी है ताकि आश्रित माता-पिता को भी शामिल किया जा सके।
कर्मचारी संगठनों की क्या है अन्य मांगें?
कर्मचारी संगठनों ने LTC (लॉन्ग टर्म कैन्टीन) के नकद भुगतान, लीव एनकैशमेंट सीमा को 300 से 400 दिन करने, रिटायरमेंट लाभों में सुधार और पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पूरी तरह बहाल करने की मांग भी की है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक OPS को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है।
अब सभी की नजरें आयोग पर टिकी हुई है
अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि 8वें वेतन आयोग इन मांगों पर क्या रुख अपनाता है और अंतिम सिफारिशों में कर्मचारियों और पेंशनर्स को कितनी राहत मिलती है। जानकारों का मानना है कि आयोग की सिफारिशें न केवल कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में सुधार ला सकती हैं, बल्कि उनकी सेवानिवृत्ति के बाद की सुरक्षा को भी मजबूत करेंगी।

0 comments:
Post a Comment