बिहार के गांव-गांव में खुशखबरी! किसानों के लिए खुला राहत का पिटारा

पटना। अगर आप गांव में रहकर अपना डेयरी व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं लेकिन पूंजी की कमी रास्ता रोक रही है, तो अब चिंता की जरूरत नहीं है। बिहार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक ऐसी पहल शुरू की है, जो खासतौर पर अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानों और बेरोजगार युवक-युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

आपको बता दें की राज्य के गव्य विकास निदेशालय के माध्यम से डेयरी फार्म विकास योजना चलाई जा रही है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को दूध उत्पादन से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना और स्थायी रोजगार उपलब्ध कराना है।

क्या है योजना की खास बात?

इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को दो दुधारू पशु या हिफर की डेयरी यूनिट स्थापित करने के लिए 100 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। यूनिट की कुल अनुमानित लागत ₹1,74,000 तय की गई है और यह पूरी राशि सरकार द्वारा दी जाएगी। यानी चयनित व्यक्ति को अपनी जेब से कोई राशि खर्च नहीं करनी होगी।

आवेदन प्रक्रिया और समयसीमा

योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑफलाइन रखी गई है। इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित तिथियों के बीच अपने जिले के संबंधित कार्यालय में जाकर फॉर्म भर सकते हैं। आवेदन पत्र सावधानीपूर्वक भरना और सभी आवश्यक दस्तावेज संलग्न करना जरूरी होगा, क्योंकि अधूरी या गलत जानकारी पर आवेदन निरस्त किया जा सकता है।

कौन कर सकता है आवेदन?

इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं:

आवेदक बिहार का स्थायी निवासी हो

आयु 18 से 55 वर्ष के बीच हो

अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंधित हो

किसान या शिक्षित बेरोजगार युवक/युवती हो

जरूरी दस्तावेज

आवेदन के साथ आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक की प्रति, पासपोर्ट साइज फोटो, शपथ पत्र, प्रशिक्षण प्रमाण पत्र और संबंधित समिति या समूह की सदस्यता प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य है।

चयन में किसे मिलेगी प्राथमिकता?

चयन प्रक्रिया में उन आवेदकों को वरीयता दी जाएगी जिन्होंने विभागीय प्रशिक्षण प्राप्त किया हो या जो दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति अथवा स्वयं सहायता समूह से जुड़े हों। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि लाभ उन्हीं लोगों को मिले जो डेयरी व्यवसाय को गंभीरता से आगे बढ़ाना चाहते हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

यह योजना न सिर्फ व्यक्तिगत आय बढ़ाने का अवसर है, बल्कि इससे गांवों में स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। डेयरी व्यवसाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। ऐसे में 100 प्रतिशत अनुदान पर यूनिट स्थापित करने का मौका निश्चित ही बड़ी राहत साबित हो सकता है।

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