केंद्र सरकार का बड़ा कदम, कर्मचारियों के लिए 2 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के लिए दो बड़ी खुशखबरी दी हैं। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) जमा पर 8.25% ब्याज दर को मंजूरी दे दी है। साथ ही, सीबीटी बोर्ड ने एक एकमुश्त अमनैस्टी योजना को भी हरी झंडी दी है, जिससे संस्थानों और ट्रस्टों से जुड़े लंबित कानूनी मामलों के समाधान की उम्मीद है।

1. EPF पर ब्याज दर में स्थिरता

केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) की 239वीं बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने की। वित्त वर्ष 2025-26 में EPF जमा पर 8.25% ब्याज मिलेगा, जो पिछले वर्ष जैसी ही दर है। विशेष बात यह है कि पिछले वर्षों में EPF ब्याज दर में उतार-चढ़ाव देखा गया है। उदाहरण के तौर पर, वित्त वर्ष 2019-20 में ब्याज दर 8.5% थी, जबकि 2015-16 में यह 8.8% थी। इस बार लगातार दूसरे साल दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जो कर्मचारियों के लिए वित्तीय स्थिरता का संकेत है।

पैसे की सुविधा: नई ब्याज दर को वित्त मंत्रालय की अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद 7 करोड़ से अधिक EPFO सदस्यों के खातों में जमा किया जाएगा। ब्याज की गणना मासिक आधार पर की जाती है, लेकिन राशि वित्त वर्ष के अंत में खाते में जुड़ती है। निष्क्रिय खातों (36 महीने तक) पर ब्याज नहीं मिलेगा।

2. एकमुश्त अमनैस्टी योजना

सीबीटी बोर्ड ने Employees’ Provident Funds and Miscellaneous Provisions Act, 1952 के तहत आयकर मान्यता प्राप्त ट्रस्टों को अनुपालन का अवसर देने के लिए एकमुश्त अमनैस्टी योजना को मंजूरी दी। इस योजना के तहत छह महीने की अवधि में संस्थानों और ट्रस्टों को कानूनी और नियामक अनुपालन पूरा करने का मौका मिलेगा। 

जिन संस्थानों ने वैधानिक योजना के बराबर या बेहतर लाभ प्रदान किए हैं, उन्हें क्षतिपूर्ति, ब्याज और दंड में छूट का लाभ मिलेगा। इस पहल से 100 से अधिक लंबित कानूनी मामलों का समाधान होने की उम्मीद है, जिससे हजारों ट्रस्ट सदस्यों को लाभ मिलेगा।

कर्मचारियों के लिए महत्व

इस फैसले से कर्मचारियों के EPF निवेश पर स्थिर ब्याज सुनिश्चित होगा और ट्रस्ट से जुड़े विवादों का समाधान भी होगा। दोनों कदम कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वित्तीय हितों को मजबूत करेंगे और भविष्य निधि प्रणाली में विश्वास बढ़ाएंगे।

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