इंटरमीडिएट एक्ट की उपधारा-3(क) बना सुरक्षा कवच
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इंटरमीडिएट एक्ट 1921 की धारा 16(छ) की उपधारा 3(क) ही शिक्षकों की सेवा सुरक्षा का मजबूत आधार है। इस प्रावधान के तहत किसी भी शिक्षक के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने से पहले जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) की पूर्व अनुमति अनिवार्य है। बिना अनुमति के न तो किसी शिक्षक को निलंबित किया जा सकता है, न सेवा समाप्त की जा सकती है और न ही उनके वेतन या अन्य परिलब्धियों में कटौती की जा सकती है। यदि प्रबंधन ऐसा करता है तो वह कार्रवाई विधि शून्य मानी जाएगी।
धारा-21 खत्म होने के बाद बढ़े विवाद
पूर्व में सेवा सुरक्षा से जुड़ी धारा-21 समाप्त होने के बाद कई जिलों में प्रबंधतंत्र द्वारा शिक्षकों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाने के मामले सामने आए। आरोप है कि अलग-अलग विद्यालयों में 300 से अधिक शिक्षकों को विभिन्न कारणों का हवाला देकर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। यह मुद्दा विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों में भी उठा, जिसके बाद शासन ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए परिपत्र जारी किया।
डीआईओएस को भी सख्त निर्देश
सरकार ने यह भी कहा है कि यदि कोई मामला डीआईओएस के पास आता है तो उसे अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। सुनवाई के नाम पर मामलों को महीनों तक लटकाना भी उत्पीड़न की श्रेणी में आएगा। ऐसे मामलों में त्वरित और विधिसम्मत निर्णय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षकों में राहत का माहौल
नई व्यवस्था के बाद एडेड विद्यालयों के शिक्षकों में राहत की भावना देखी जा रही है। अब प्रबंधतंत्र की मनमानी पर अंकुश लगेगा और शिक्षकों की नौकरी अधिक सुरक्षित होगी। सरकार का यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि विद्यालयों में शैक्षणिक वातावरण भी अधिक स्थिर और सकारात्मक बनेगा।

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